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धारा 80सी के तहत निवेश पर आयकर छूट की बढ़ सकती है सीमा

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शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली 
Updated Tue, 22 Jan 2019 02:52 AM IST

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अगले एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में वेतनभोगी मध्यमवर्गीय को खुश करने के लिए निवेश पर आयकर में छूट की सीमा को बढ़ाया जा सकता है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इस बार आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत निवेश की सीमा को वर्तमान डेढ़ लाख रुपये से बढ़ा कर दो लाख रुपये या इससे भी ज्यादा की जा सकती है। यही नहीं, टियर-2 सूची के शहरों में रहने वालों को भी महानगरों की तरह मकान किराया भत्ता में आयकर छूट की सुविधा दी जा सकती है।

इस विषय से जुड़े आधिकारिक सूत्र का कहना है कि आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत जो निवेश पर छूट का प्रावधान है, उसे बढ़ाने के बारे में गंभीरतापूर्वक विचार किया जा रहा है। इस तरह के कई रिप्रजेंटेशन मिले हैं कि इस सीमा को वर्तमान डेढ़ लाख रुपये से बढ़ा कर दो या ढाई लाख रुपये कर दिया जाए। क्लियरटैक्स के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्चित गुप्ता का कहना है कि यदि ऐसा होता है इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इससे पहले धारा 80-सी के तहत निवेश सीमा को केंद्रीय बजट 2014-15 में संशोधित किया गया था। उस समय इसे एक लाख से रुपए से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपए किया गया था। 

अर्चित गुप्ता का कहना है कि समाज में जिस तरह से लोगों का आमदनी का स्तर बढ़ता जा रहा है, उसे देखते हुए निवेश पर छूट की सीमा को डेढ़ लाख रुपये तक ही सीमित करना कम लगता है। इसके साथ ही मुद्रास्फीति को भी जोड़ दिया जाए तो यह राशि अब करों पर बचत के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि अगले बजट में बजट धारा 80 सी के तहत छूट की सीमा को बढ़ाकर दो लाख रुपए या इससे भी ज्यादा किया जा सकता है।

इस तरह की भी खबरें आ रही हैं कि बैंगलुरू, पुणे, हैदराबाद जैसे टियर-2 शहरों में रहने वालों को भी मकान किराया भत्ता -एचआरए- मद में मिलने वाली छूट की सीमा में भी बढ़ोतरी की जा सकती है। अभी आयकर विभाग सिर्फ मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई को ही महानगर मानता है। इन शहरों में रहने वालों को वेतन में मकान किराये भत्ते के तहत वेतन के 50 फीसदी हिस्से तक का दावा कर सकते हैं। इस सूची में पुणे, बेंगलुरू, हैदराबाद जैसे शहरों के जुड़ने का लाभ करदाताओं को मिलेगा क्योंकि वहां भी मकान किराये में भारी बढ़ोतरी हो रही है। 

विभिन्न उद्योग संगठनों ने तो आवास ऋण के बदले चुकाये जाने वाले ब्याज पर भी छूट की सीमा बढ़ाने की मांग की है। इनका कहना है कि लगभग हर आयकर दाता आवास ऋण के जरिये चुकाये गए ब्याज पर छूट प्राप्त करते हैं। इस समय सिर्फ दो लाख रुपए तक के ब्याज कम्पोनेंट पर दी जा रही छूट अब पर्याप्त नहीं हैं। घर खरीदने वाले कम से कम ढाई लाख रुपये तक के ब्याज भुगतान पर छूट मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। 

अगले एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में वेतनभोगी मध्यमवर्गीय को खुश करने के लिए निवेश पर आयकर में छूट की सीमा को बढ़ाया जा सकता है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इस बार आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत निवेश की सीमा को वर्तमान डेढ़ लाख रुपये से बढ़ा कर दो लाख रुपये या इससे भी ज्यादा की जा सकती है। यही नहीं, टियर-2 सूची के शहरों में रहने वालों को भी महानगरों की तरह मकान किराया भत्ता में आयकर छूट की सुविधा दी जा सकती है।

इस विषय से जुड़े आधिकारिक सूत्र का कहना है कि आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत जो निवेश पर छूट का प्रावधान है, उसे बढ़ाने के बारे में गंभीरतापूर्वक विचार किया जा रहा है। इस तरह के कई रिप्रजेंटेशन मिले हैं कि इस सीमा को वर्तमान डेढ़ लाख रुपये से बढ़ा कर दो या ढाई लाख रुपये कर दिया जाए। क्लियरटैक्स के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्चित गुप्ता का कहना है कि यदि ऐसा होता है इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इससे पहले धारा 80-सी के तहत निवेश सीमा को केंद्रीय बजट 2014-15 में संशोधित किया गया था। उस समय इसे एक लाख से रुपए से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपए किया गया था। 

अर्चित गुप्ता का कहना है कि समाज में जिस तरह से लोगों का आमदनी का स्तर बढ़ता जा रहा है, उसे देखते हुए निवेश पर छूट की सीमा को डेढ़ लाख रुपये तक ही सीमित करना कम लगता है। इसके साथ ही मुद्रास्फीति को भी जोड़ दिया जाए तो यह राशि अब करों पर बचत के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि अगले बजट में बजट धारा 80 सी के तहत छूट की सीमा को बढ़ाकर दो लाख रुपए या इससे भी ज्यादा किया जा सकता है।

इस तरह की भी खबरें आ रही हैं कि बैंगलुरू, पुणे, हैदराबाद जैसे टियर-2 शहरों में रहने वालों को भी मकान किराया भत्ता -एचआरए- मद में मिलने वाली छूट की सीमा में भी बढ़ोतरी की जा सकती है। अभी आयकर विभाग सिर्फ मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई को ही महानगर मानता है। इन शहरों में रहने वालों को वेतन में मकान किराये भत्ते के तहत वेतन के 50 फीसदी हिस्से तक का दावा कर सकते हैं। इस सूची में पुणे, बेंगलुरू, हैदराबाद जैसे शहरों के जुड़ने का लाभ करदाताओं को मिलेगा क्योंकि वहां भी मकान किराये में भारी बढ़ोतरी हो रही है। 

विभिन्न उद्योग संगठनों ने तो आवास ऋण के बदले चुकाये जाने वाले ब्याज पर भी छूट की सीमा बढ़ाने की मांग की है। इनका कहना है कि लगभग हर आयकर दाता आवास ऋण के जरिये चुकाये गए ब्याज पर छूट प्राप्त करते हैं। इस समय सिर्फ दो लाख रुपए तक के ब्याज कम्पोनेंट पर दी जा रही छूट अब पर्याप्त नहीं हैं। घर खरीदने वाले कम से कम ढाई लाख रुपये तक के ब्याज भुगतान पर छूट मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।