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राजनीति के लिए हर महीने करोड़ों का नुकसान झेल रहे हैं मनोज तिवारी

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अक्सर लोग मजाक में कहते हैं कि राजनीति  इश्क की तरह बुरी शै है। जिसे इसकी लत लग जाती है, वह अपना सब कुछ गंवाकर भी इससे अपना पीछा नहीं छुड़ा पाता। यह बात दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी पर पूरी तरह फिट बैठती है।  

मनोज तिवारी ने अपने करियर की शुरुआत भोजपुरी गायक के रूप में की। ‘तू लगावे लू जब लिपिस्टिक’ और ‘जिया हो बिहार के लाला’ जैसे सैकड़ों गानों से उन्होंने शोहरत की बुलंदी को छुआ और अपनी मधुर आवाज से बड़ी जल्दी लोगों के दिल में बस गये। गायकी में प्रसिद्धि पाने के बाद उन्होंने जल्दी ही भोजपुरी फिल्मों की तरफ कदम बढ़ा दिए। उन्होंने ‘ससुरा बड़ा पैसा वाला’, ‘दारोगा बाबू’ और ‘बंधन टूटे ना’ जैसी कमर्शियल तौर पर बेहद सफल फ़िल्में कीं।

कहा जाता है कि एक भोजपुरी फिल्म के लिए वे सबसे ज्यादा पैसे लेने वाले अभिनेताओं में से एक हैं क्योंकि उनका नाम ही भोजपुरी फिल्मों में सफलता की गारंटी माना जाता है। फिल्मों और गानों से से सुपर हिट हुए मनोज तिवारी जल्दी ही राजनीति की दुनिया में आ गये और पंद्रहवीं लोकसभा के लिए उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर योगी आदित्यनाथ के खिलाफ गोरखपुर सीट से चुनाव लड़ा। उस चुनाव में तो उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन जल्दी ही वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये और सोलहवीं लोकसभा के लिए दिल्ली की नार्थ ईस्ट सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी आम आदमी पार्टी नेता आनंद कुमार और उस सीट से कांग्रेस के सांसद जेपी अग्रवाल को हराया।

मनोज तिवारी की लोकप्रियता देख भाजपा ने उन्हें दिल्ली प्रदेश का अध्यक्ष बना दिया। उनके नेतृत्व में पार्टी ने निकाय चुनाव लड़ा और लगभग पंद्रह साल की एंटी इनकम्बेंसी के बाद भी पार्टी तीनों नगर निगमों में भारी जीत हासिल करने में कामयाब रही। इस समय वे लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी को मजबूत करने का काम कर रहे हैं।  पूर्वांचली लोगों में उनकी पैठ देखकर पार्टी को बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है।

क्या है आजकल की दिनचर्या

लगभग 48 साल के हो चुके मनोज तिवारी आजकल रोज सुबह लगभग आठ बजे सोकर उठ जाते हैं। नौ बजे से ही उनके दिल्ली के नार्थ एवेन्यू स्थित आवास पर उनसे मिलने वालों की भीड़ लग जाती है। वे लोगों से मुलाकात करने के दौरान ही सबके साथ चाय पीते हैं। अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को सुनने के साथ-साथ वे अपने सहयोगी को समस्याओं को दूर करने सम्बंधी जरुरी निर्देश देते रहते हैं। 

लगभग दो घंटे की मुलाकात के बाद ग्यारह बजे दो रोटी और मौसमी सब्जी के साथ नाश्ता करते हैं। इसके बाद ही वे क्षेत्र में निकल जाते हैं। पार्टी से सम्बंधी कोई काम होने की स्थिति में कुछ ही दूर पंडित पन्त मार्ग पर स्थित पार्टी कार्यालय पहुंच जाते हैं और विभिन्न विभागों की बैठक लेते हैं या अपने सहयोगियों के साथ अगली रणनीति पर विचार करते हैं। क्षेत्र में किसी कार्यक्रम के लिए उन्हें यही समय सुहाता है।  दिनभर बैठकों और मुलाकातों का दौर चलता रहता है। दोपहर में खाना खाने की बजाय वे कुछ हल्का नाश्ता लेना पसंद करते हैं। शाम के समय पार्टी कार्यालय में ही सहयोगियों के साथ कुछ नाश्ता-चाय ले लेते हैं।

दिन से ज्यादा रात को काम

मनोज तिवारी के करीबियों के मुताबिक़ वे लगातार झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर गरीबों से मुलाकात करते हैं। लोगों का दुःख-दर्द समझते हैं और अपने स्तर पर जो भी संभव हो, उनकी मदद करने की कोशिश करते हैं। इस मुलाकात में समय का कोई नियम नहीं है। घर वापसी रात को लगभग बारह बजे के आसपास होती है। इस समय वे दाल, चावल और दो रोटी खाते हैं। उनके कुछ ख़ास करीबी रात के दो बजे तक भी उनसे तमाम मुद्दों पर बातचीत करते हैं। इसके बाद उनके सोने का समय होता है।

उनके एक करीबी के मुताबिक़ मृदुल भैया (उनका उपनाम) फिल्म छोड़ राजनीति को ही अपनी दुनिया बना चुके हैं। उनके एक करीबी ने बताया कि वे फिल्मी दुनिया छोड़कर हर महीने करोड़ों का नुकसान कर रहे हैं। सहयोगी के मुताबिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए एक घंटे के सोलह लाख रूपये तक लेने वाले मनोज तिवारी राजनीति में कुछ कमा रहे हैं, या गंवा रहे हैं, इसका आकलन कल का समय करेगा। बकौल सहयोगी, मनोज तिवारी कहते हैं कि पैसा बहुत कमा लिया, अब समाज को वह वापस करना चाहते हैं जो उसने उन्हें दिया है। इसलिए वे इस दुनिया में आकर ही खुश हैं। गाने के रियाज के लिए तो अब समय नहीं मिलता लेकिन राजनीतिक कार्यक्रमों में जनता की आवाज पर दो लाइन गाकर ही उनके गायक मन को तसल्ली मिल जाती है।