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तुलसी गबार्ड ने शुरू किया अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए अपना अभियान

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अमेरिकी कांग्रेस में पहुंचने वाली पहली हिंदू-अमेरिकी तुलसी गबार्ड ने शनिवार को राष्ट्रपति पद पर चुनाव लड़ने के लिए अपना अधिकारिक अभियान शुरू कर दिया। अमेरिकी सेना में मेजर रहीं और 12 महीने के लिए इराक में युद्ध तैनाती पर रह चुकीं 37 वर्षीय तुलसी ने यहां एक कार्यक्रम में मिशन-2020 में वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर उतरने के लिए अपनी दावेदारी ठोकने की औपचारिक शुरुआत की। 

हवाई से चार बार से रिकॉर्ड वोटों से जीतकर सांसद बन रहीं तुलसी ने कहा कि जब हम वालंटियर के तौर पर सेवा करने के लिए अपना दायां हाथ उठाते हैं, तो अपने देश की सेवा के लिए हमारे निजी हित किनारे हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसी भावना के साथ आज मैं संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करती हूं। 

उन्होंने कहा, आगे का रास्ता आसान नहीं होगा। मुश्किलें कड़ी होंगी, लेकिन मैं जानती हूं कि जब हम अपने लोगों ओर हमारे देश के लोगों के प्यार के लिए एकजुट खड़े होंगे तो कोई भी ऐसी बाधा नहीं है, जिसका हम मुकाबला नहीं कर सकते। कोई ऐसी लड़ाई नहीं है, जिसे हम जीत नहीं सकते।%

भारतीय नहीं होकर भी हैं हिंदू

तुलसी गबार्ड भारतीय मूल की नहीं होकर भी हिंदू हैं। दरअसल उनका जन्म अमेरिका के समोआ में एक कैथोलिक ईसाई परिवार में हुआ था। लेकिन उनकी मां हिंदू धर्म को मानने वाले हवाई द्वीप के कॉकेशियन समुदाय से थीं। इसी के चलते तुलसी बचपन से ही हिंदू धर्म की अनुयायी रही हैं। पहली हिंदू-अमेरिकी सांसद बनने के बाद तुलसी ने भगवत गीता के नाम पर ही शपथ लेकर सभी को चौंका दिया था।

अमेरिकी कांग्रेस में पहुंचने वाली पहली हिंदू-अमेरिकी तुलसी गबार्ड ने शनिवार को राष्ट्रपति पद पर चुनाव लड़ने के लिए अपना अधिकारिक अभियान शुरू कर दिया। अमेरिकी सेना में मेजर रहीं और 12 महीने के लिए इराक में युद्ध तैनाती पर रह चुकीं 37 वर्षीय तुलसी ने यहां एक कार्यक्रम में मिशन-2020 में वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर उतरने के लिए अपनी दावेदारी ठोकने की औपचारिक शुरुआत की। 

हवाई से चार बार से रिकॉर्ड वोटों से जीतकर सांसद बन रहीं तुलसी ने कहा कि जब हम वालंटियर के तौर पर सेवा करने के लिए अपना दायां हाथ उठाते हैं, तो अपने देश की सेवा के लिए हमारे निजी हित किनारे हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसी भावना के साथ आज मैं संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करती हूं। 

उन्होंने कहा, आगे का रास्ता आसान नहीं होगा। मुश्किलें कड़ी होंगी, लेकिन मैं जानती हूं कि जब हम अपने लोगों ओर हमारे देश के लोगों के प्यार के लिए एकजुट खड़े होंगे तो कोई भी ऐसी बाधा नहीं है, जिसका हम मुकाबला नहीं कर सकते। कोई ऐसी लड़ाई नहीं है, जिसे हम जीत नहीं सकते।%

भारतीय नहीं होकर भी हैं हिंदू

तुलसी गबार्ड भारतीय मूल की नहीं होकर भी हिंदू हैं। दरअसल उनका जन्म अमेरिका के समोआ में एक कैथोलिक ईसाई परिवार में हुआ था। लेकिन उनकी मां हिंदू धर्म को मानने वाले हवाई द्वीप के कॉकेशियन समुदाय से थीं। इसी के चलते तुलसी बचपन से ही हिंदू धर्म की अनुयायी रही हैं। पहली हिंदू-अमेरिकी सांसद बनने के बाद तुलसी ने भगवत गीता के नाम पर ही शपथ लेकर सभी को चौंका दिया था।