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2018 में 41 मोबाइल कंपनियों ने भारत को कहा बाय-बाय, 15 की हुई एंट्री

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वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में अंतरिम बजट पेश करते हुए कहा था कि भारत में सबसे ज्यादा मोबाइल डाटा यूजर्स हैं और साथ ही भारत में सबसे सस्ता इंटरनेट मिल रहा है। वहीं उन्होंने कहा कि अगले 5 सालों में भारत के 1 लाख गांवों को डिजिटल गांव बनाया जाएगा। पीयूष गोयल ने बताया था कि मेक इन इंडिया के तहत भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की संख्या 268 पहुंच गई है जो पहले सिर्फ 2 थीं।

वहीं अब साइबरमीडिया रिसर्च की रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि साल 2018 मे 41 स्मार्टफोन कंपनियों ने भारतीय बाजार से अपना बिस्तर समेट लिया है, जबकि 15 नई मोबाइल कंपनियों की भारत में एंट्री हुई है। साइबरमीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक एसर, डाटाविंड, कोमियो, एचटीसी जैसी कंपनियों के भारत छोड़ने की वजह भारतीय मोबाइल बाजार में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साल 2019 में कई नई मोबाइल कंपनियां भी भारत की ओर अपना रुख करेंगी।

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काउंटरप्वाइंट की रिपोर्ट को मानें तो साल 2019 में नूबिया और रेजर जैसी करीब 15 कंपनियां फिर से भारतीय बाजार में दस्तक दे सकती हैं। रिपोर्ट की मानें तो साल 2014-15 में भारत में करीब 300 मोबाइल कंपनियां अपना कारोबार कर रही थीं लेकिन अब इनकी संख्या 200 रह गई है।

विषेशज्ञों का कहना है कि छोटी मोबाइल कंपनियां कम कीमत में ज्यादा फीचर देने में सक्षम नहीं है, जबकि चाइनीज मोबाइल कंपनियां कम कीमत के स्मार्टफोन में महंगे स्मार्टफोन जैसे फीचर्स दे रही हैं। साल 2018 में शाओमी, वीवो और ओप्पो तीनों को मिलाकर भारतीय मोबाइल बाजार में शेयर 46 फीसदी रहा, जबकि माइक्रोमैक्स, लावा, इंटेक्स और कार्बन जैसी भारतयी कंपनियों का बाजार शेयर सिर्फ 8 फीसदी रहा।

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में अंतरिम बजट पेश करते हुए कहा था कि भारत में सबसे ज्यादा मोबाइल डाटा यूजर्स हैं और साथ ही भारत में सबसे सस्ता इंटरनेट मिल रहा है। वहीं उन्होंने कहा कि अगले 5 सालों में भारत के 1 लाख गांवों को डिजिटल गांव बनाया जाएगा। पीयूष गोयल ने बताया था कि मेक इन इंडिया के तहत भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की संख्या 268 पहुंच गई है जो पहले सिर्फ 2 थीं।

वहीं अब साइबरमीडिया रिसर्च की रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि साल 2018 मे 41 स्मार्टफोन कंपनियों ने भारतीय बाजार से अपना बिस्तर समेट लिया है, जबकि 15 नई मोबाइल कंपनियों की भारत में एंट्री हुई है। साइबरमीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक एसर, डाटाविंड, कोमियो, एचटीसी जैसी कंपनियों के भारत छोड़ने की वजह भारतीय मोबाइल बाजार में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साल 2019 में कई नई मोबाइल कंपनियां भी भारत की ओर अपना रुख करेंगी।

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विषेशज्ञों का कहना है कि छोटी मोबाइल कंपनियां कम कीमत में ज्यादा फीचर देने में सक्षम नहीं है, जबकि चाइनीज मोबाइल कंपनियां कम कीमत के स्मार्टफोन में महंगे स्मार्टफोन जैसे फीचर्स दे रही हैं। साल 2018 में शाओमी, वीवो और ओप्पो तीनों को मिलाकर भारतीय मोबाइल बाजार में शेयर 46 फीसदी रहा, जबकि माइक्रोमैक्स, लावा, इंटेक्स और कार्बन जैसी भारतयी कंपनियों का बाजार शेयर सिर्फ 8 फीसदी रहा।

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