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फर्जी कॉल सेंटर से अमेरिकियों का डाटा लेने एफबीआई पहुंचा अहमदाबाद

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गुजरात के अहमदाबाद में दो और फर्जी कॉल सेंटरों के भंडाफोड़ के बाद एफबीआई अधिकारी स्थानीय पुलिस के समन्वय के लिए शनिवार को शहर पहुंचे। एफबीआई ने इन अवैध कॉल सेंटरों के कंप्यूटर से हजारों अमेरिकियों का डाटा वापस लिया। 

पहले कॉल सेंटर से इंटर्नल रेवन्यू सर्विस (आईआरएस) के अधिकारी-कर्मचारी बताकर अमेरिकी नागरिकों से ठगी की जा रही थी। ये लोग अमेरिकी नागरिकों को टैक्स चोरी की एवज में डराया करते थे और फिर उनसे पैसे ऐंठते थे। नागरिकों से गूगल प्ले के माध्यम से एक नंबर लेकर रुपये लिए जाते थे। मामले में गिरफ्तार लोगों ने हजारों डॉलर ऐंठने की बात कबूल की है। 

इस बार घोटालेबाजों ने खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी के अधिकारी बताया और लोगों को डराया कि वह उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करेंगे। इन्होंने लोगों को डराते हुए कहा कि उनकी गाड़ी में कोकेन जैसे ड्रग्स के निशान मिले हैं। 

भारत में एफबीआई इंटरनेट क्राइम कंप्लेंट सेंटर (आईसी3) के स्पेशल अटैची शोएब दाउद अहमदाबाद साइबर सेल द्वारा की गईं गिरफ्तारियों पर जानकारी लेने के लिए अहमदाबाद पहुंचे। पुलिस कमिश्नर एके सिंह ने भी कहा कि शोएब दाउद को एक कॉल सूची और अमेरिकी नागरिकों के संवेदनशील व्यक्तिगत डाटा को कॉल सेंटर कंप्यूटर से पुनर्प्राप्त कर प्रदान किया गया है। 

आरोपी रोजाना 2 हजार कॉल करने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते थे। वह खुद को खुफिया अधिकारी बताकर अमेरिकी नागरिकों को डराते थे। आईट्यून पेमेंट कार्ड से आरोपियों को पेमेंट किए गए। जिनको कॉल किया गया उनमें से 5 फीसदी शिकार हुए और इन लोगों ने आरोपियों को पैसे ट्रांसफर किए। डाटा पुनः प्राप्त करने में गुजरात टेक्निकल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी मदद की।

6 जून, 2018 को अमेरिका स्थित ट्रेजरी इंस्पेक्टर जनरल फॉर टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन (टीआईजीटीए) को इस बारे में शिकायतें मिली थीं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सामने इस संबंध में रिपोर्ट भी पेश की गई। 

गुजरात के अहमदाबाद में दो और फर्जी कॉल सेंटरों के भंडाफोड़ के बाद एफबीआई अधिकारी स्थानीय पुलिस के समन्वय के लिए शनिवार को शहर पहुंचे। एफबीआई ने इन अवैध कॉल सेंटरों के कंप्यूटर से हजारों अमेरिकियों का डाटा वापस लिया। 

पहले कॉल सेंटर से इंटर्नल रेवन्यू सर्विस (आईआरएस) के अधिकारी-कर्मचारी बताकर अमेरिकी नागरिकों से ठगी की जा रही थी। ये लोग अमेरिकी नागरिकों को टैक्स चोरी की एवज में डराया करते थे और फिर उनसे पैसे ऐंठते थे। नागरिकों से गूगल प्ले के माध्यम से एक नंबर लेकर रुपये लिए जाते थे। मामले में गिरफ्तार लोगों ने हजारों डॉलर ऐंठने की बात कबूल की है। 

इस बार घोटालेबाजों ने खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी के अधिकारी बताया और लोगों को डराया कि वह उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करेंगे। इन्होंने लोगों को डराते हुए कहा कि उनकी गाड़ी में कोकेन जैसे ड्रग्स के निशान मिले हैं। 

भारत में एफबीआई इंटरनेट क्राइम कंप्लेंट सेंटर (आईसी3) के स्पेशल अटैची शोएब दाउद अहमदाबाद साइबर सेल द्वारा की गईं गिरफ्तारियों पर जानकारी लेने के लिए अहमदाबाद पहुंचे। पुलिस कमिश्नर एके सिंह ने भी कहा कि शोएब दाउद को एक कॉल सूची और अमेरिकी नागरिकों के संवेदनशील व्यक्तिगत डाटा को कॉल सेंटर कंप्यूटर से पुनर्प्राप्त कर प्रदान किया गया है। 

आरोपी रोजाना 2 हजार कॉल करने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते थे। वह खुद को खुफिया अधिकारी बताकर अमेरिकी नागरिकों को डराते थे। आईट्यून पेमेंट कार्ड से आरोपियों को पेमेंट किए गए। जिनको कॉल किया गया उनमें से 5 फीसदी शिकार हुए और इन लोगों ने आरोपियों को पैसे ट्रांसफर किए। डाटा पुनः प्राप्त करने में गुजरात टेक्निकल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी मदद की।

6 जून, 2018 को अमेरिका स्थित ट्रेजरी इंस्पेक्टर जनरल फॉर टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन (टीआईजीटीए) को इस बारे में शिकायतें मिली थीं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सामने इस संबंध में रिपोर्ट भी पेश की गई।