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कर्नाटक संकट: येदियुरप्पा की कोशिशों ने पार्टी में डाली दरार, ऑडियो क्लिप पर यह दिया जवाब

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Updated Sun, 10 Feb 2019 12:49 PM IST

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कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर अपनी सरकार को बचाने की कोशिशें कर रही हैं। इसकी वजह है उसके बागी विधायकों का भाजपा के संपर्क में होना। राज्य के भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा द्वारा लगातार गठबंधन को तोड़ने की कोशिशें करने से पार्टी के विधायक नाराज हैं। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि वह मुख्यमंत्री बनने के लिए बेकरार हैं। विधायकों की खरीद-फरोख्त के लिए उन्होंने अनुभवी टीम को अलग रखा हुआ है और दूसरे नंबर के नेतृत्व पर भरोसा करके कांग्रेस और जेडीएस के नाराज विधायकों को अपनी तरफ करना चाहते हैं।

जिसकी वजह से पार्टी के अंदर दरार पड़ गई है। पार्टी के पदाधिकारियों और येदियुरप्पा के सिपाहियों ने खुद को उनके भाजपा को राज्य की सत्ता पर काबिज करने की कोशिशों से अलग कर लिया है। सूत्रों के अनुसार आर अशोक, बासवाराज बोम्मई, केएस ईशवरप्पा, सीटी रवि और अन्य नेताओं ने खुद को येदियुरप्पा द्वारा सीएन अश्वथनारायण, बालाचंद्र जारीखोली और अरविंद लिंबावली जैसे विधायकों को अपने पक्ष में करने की कोशिशों से दूर कर लिया है।

माना जा रहा है कि येदियुरप्पा अपने दूसरे बेटे बीवाई विजयेंद्र से काफी प्रभावित हैं। डेढ़ महीने पहले अशोक येदियुरप्पा के विश्वासपात्र थे। हालांकि पार्टी अध्यक्ष ने अशोक की विफलता को लेकर दूसरे नेतृत्व से सलाह ली और उन्हें प्रशासनिक और राजनीतिक फैसलों से बाहर रखने का निर्णय लिया। 

भाजपा के एक नेता ने कहा, ‘डेढ़ महीने से अशोक और येदियुरप्पा आपस में बात नहीं कर रहे हैं। पूर्व उप मुख्यमंत्री को उस समय लूप से बाहर रखा गया जब बंगलूरू की तीन लोकसभा सीटों के लिए बैठक बुलाई गई थी। उन्होंने अपना फोन स्विच ऑफ कर लिया था। जिसके बाद येदियुरप्पा को अपने बीच जारी मतभेद को दूर करने के लिए वी सोमन्ना और प्रभाकर कोरे को दूत बनाकर भेजना पड़ा था।’

पार्टी अशोक, अश्वथनारायण, सीटी रवि, डीवी सदानंद गौड़ा और शोभा करंडलजे के बीच काफी प्रतिस्पर्धा देख रही है जो वोक्कालिगा का चेहरा बनना चाहते हैं। कहा जा रहा है कि येदियुरप्पा ने बोम्मई को अपने कोर समूह से हटा दिया है। नए राजनीतिज्ञों ने येदियुरप्पा को आश्वासन दिया है कि वह सत्ताधारी गठबंधन सरकार से 10-15 विधायक तोड़कर भाजपा में ले आएंगे। पार्टी हाई कमांड से येदियुरप्पा को काफी चेतावनी मिल चुकी हैं लेकिन वह फिर भी सत्ता पर राज करने के लिए बेकरार हैं। 

ऑडियो मामला

ऑडियो क्लिप को लेकर का बयान आया है। उन्होंने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि उन्होंने जदएस विधायक नगनगौड़ा के बेटे शरणगौड़ा से देवदुर्ग के इंस्पेक्शन बंगले में मुलाकात की थी। येदियुरप्पा का आरोप है कि विधायक के बेटे ने मुख्यमंत्री की सलाह पर उनसे मुलाकात की थी। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘उसने (शरणगौड़ा) बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया और अपनी सुविधा अनुसार ऑडियो क्लिप को काटा गया है। जिससे कि एक बातचीत का एक बड़ा हिस्सा गायब है। एचडी कुमारस्वामी ने साजिश के तहत शरणगौड़ा को इंस्पेक्शन बंगले पर भेजा था।’

येदियुरप्पा ने आगे कहा, ‘कुमारस्वामी राजनीति में एक नए स्तर पर पहुंच गए हैं। उन्होंने चुने हुए प्रतिनिधियों को फंसाने का नया ट्रेंड शुरू किया है। यह सच है कि मैंने शरणगौड़ा से बातचीत की है लेकिन सबकुछ सामने नहीं आया। मुख्यमंत्री षड्यंत्र की राजनीति में लिप्त हैं। विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार एक ईमानदार शख्स हैं। मैंने उन्हें कुछ भी ऑफर नहीं किया है। कुमारस्वामी ने जो प्रेस कांफ्रेस में कहा वह सच से काफी दूर है।’

कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर अपनी सरकार को बचाने की कोशिशें कर रही हैं। इसकी वजह है उसके बागी विधायकों का भाजपा के संपर्क में होना। राज्य के भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा द्वारा लगातार गठबंधन को तोड़ने की कोशिशें करने से पार्टी के विधायक नाराज हैं। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि वह मुख्यमंत्री बनने के लिए बेकरार हैं। विधायकों की खरीद-फरोख्त के लिए उन्होंने अनुभवी टीम को अलग रखा हुआ है और दूसरे नंबर के नेतृत्व पर भरोसा करके कांग्रेस और जेडीएस के नाराज विधायकों को अपनी तरफ करना चाहते हैं।

जिसकी वजह से पार्टी के अंदर दरार पड़ गई है। पार्टी के पदाधिकारियों और येदियुरप्पा के सिपाहियों ने खुद को उनके भाजपा को राज्य की सत्ता पर काबिज करने की कोशिशों से अलग कर लिया है। सूत्रों के अनुसार आर अशोक, बासवाराज बोम्मई, केएस ईशवरप्पा, सीटी रवि और अन्य नेताओं ने खुद को येदियुरप्पा द्वारा सीएन अश्वथनारायण, बालाचंद्र जारीखोली और अरविंद लिंबावली जैसे विधायकों को अपने पक्ष में करने की कोशिशों से दूर कर लिया है।

माना जा रहा है कि येदियुरप्पा अपने दूसरे बेटे बीवाई विजयेंद्र से काफी प्रभावित हैं। डेढ़ महीने पहले अशोक येदियुरप्पा के विश्वासपात्र थे। हालांकि पार्टी अध्यक्ष ने अशोक की विफलता को लेकर दूसरे नेतृत्व से सलाह ली और उन्हें प्रशासनिक और राजनीतिक फैसलों से बाहर रखने का निर्णय लिया। 

भाजपा के एक नेता ने कहा, ‘डेढ़ महीने से अशोक और येदियुरप्पा आपस में बात नहीं कर रहे हैं। पूर्व उप मुख्यमंत्री को उस समय लूप से बाहर रखा गया जब बंगलूरू की तीन लोकसभा सीटों के लिए बैठक बुलाई गई थी। उन्होंने अपना फोन स्विच ऑफ कर लिया था। जिसके बाद येदियुरप्पा को अपने बीच जारी मतभेद को दूर करने के लिए वी सोमन्ना और प्रभाकर कोरे को दूत बनाकर भेजना पड़ा था।’

पार्टी अशोक, अश्वथनारायण, सीटी रवि, डीवी सदानंद गौड़ा और शोभा करंडलजे के बीच काफी प्रतिस्पर्धा देख रही है जो वोक्कालिगा का चेहरा बनना चाहते हैं। कहा जा रहा है कि येदियुरप्पा ने बोम्मई को अपने कोर समूह से हटा दिया है। नए राजनीतिज्ञों ने येदियुरप्पा को आश्वासन दिया है कि वह सत्ताधारी गठबंधन सरकार से 10-15 विधायक तोड़कर भाजपा में ले आएंगे। पार्टी हाई कमांड से येदियुरप्पा को काफी चेतावनी मिल चुकी हैं लेकिन वह फिर भी सत्ता पर राज करने के लिए बेकरार हैं। 

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