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राजनीति का नया दौर, अदालत पर भी हमला, कहीं सरकार बदलने का संकेत तो नहीं?

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मां-बेटे की सरकार, रिमोट कंट्रोल की सरकार, दामाद श्री, जमानत पर परिवार, जमानत पर पार्टी के रास्ते वंशवाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हमले बढ़ते गए तो जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने खुलकर कहना शुरू किया कि चौकीदार चोर है। बोला ही नहीं नारा भी लगवाया चौकीदार चोर है। प्रधानमंत्री ने गुंटूर में कहा कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अपने ससुर और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नंदमूरि तारक रामाराव के पीठे में छुरा घोंपा। चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी बाप-बेटे की पार्टी है।  

प्रधानमंत्री ने आरोप उछाला था तो जवाब भी आया। चंद्र बाबू नायडू ने जवाब दिया कि ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। इनकी एक पत्नी भी हैं, जसोदा बेन। प्रधानमंत्री परिवार का प्रेम और इसकी व्यवस्था को नहीं समझते। चंद्र बाबू नायडू इससे भी आगे बढ़े और चार साल तक एनडीए के साथ रहने वाले नायडू ने आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा न दिए जाने को प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया धोखा बताया। प्रधानमंत्री के पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप और जवाब में ममता बनर्जी की जुबान में तल्खी भी कोई कम नहीं है। यहां तक कि केन्द्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई के जवाब में कोलकाता पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह से संघीय ढांचे की चूल हिला देने वाली है।

अब राहुल हुए आक्रामक 

राहुल गांधी अब एक पार्टी के अध्यक्ष हैं। लेकिन इस पद पर बैठने के काफी समय बाद तक पप्पू कहे जाते रहे। प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी जनसभा में बिना नाम लिए कहा। नामदार कहा। फिर नाम लेकर बोले। प्रधानमंत्री ने वाराणसी की जनसभा में कांग्रेस अध्यक्ष की मिमिक्री भी की। जवाब में राहुल गांधी ने पहला ताना संसद में सूटबूट की सरकार का मारा। इसके बाद वह नहीं रुके। अभी पप्पू इस शब्द का प्रयोग नहीं हो रहा है। जवाब में विपक्ष प्रधानमंत्री को खुलकर जुमला राजा और प्रधानमंत्री को झूठा कहा। ऐसा नहीं है कि इस तरह के आरोप पहली बार लग रहे हैं। 1980 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को सीधे बोफोर्स दलाल कहा गया था। राजीव गांधी चोर है का नारा भी लगा था। अब उसी तर्ज पर कांग्रेस अध्यक्ष भी नारा लगवाते हैं कि देश का चौकीदार चोर है। पहले भाजपा के निशाने पर केवल राहुल गांधी थे। कांग्रेस के वह तमाम नेता थे जो किसी न किसी मामले में जांच एजेंसी के आरोप का सामना कर रहे थे। अब प्रियंका गांधी वाड्रा हैं। राहुल गांधी ने जवाब में पहले

राजनीति का नया दौर

यह राजनीति का नया दौर है, जब राजनीतिक दलों के प्रमुख एक दूसरे पर आरोप लगाने के साथ-साथ देश की संवैधानिक संस्थाओं को भी खुलकर निशाना बना रहे हैं। सीएजी पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया है। सीबीआई में दो अफसरों की लड़ाई और लड़ाई में प्रधानमंत्री कार्यालय का दखल ने विपक्ष को इस पर राजनीति करने की खुली छूट दे दी है। प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई, पूछताछ पर भी दलगत राजनीति ने बना भरोसा ने उठाना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय लोकदल के एक वरिष्ठ नेता सवाल उठाते हुए कहते हैं कि अभी तक कोई बड़ा मामला होने पर सीबीआई से जांच की मांग होती रही है। अब सीबीआई की ही साख पर सवाल है। इस सवाल को लेकर प्रधानमंत्री और सरकार के सामने लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े खड़े हैं। विपक्ष सीधे केन्द्र सरकार पर सरकारी संस्थाओं को लगातार कमजोर करने का आरोप लगा रहा है।

अदालत पर भी हमला

भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने दीपावली पर प्रदूषण को केन्द्र में रखकर दिल्ली में पटाखे जलाने पर रोक लगा दी थी। राजनीति के एक खास वर्ग ने इसे धर्म से जोड़ लिया था और सोशल मीडिया पर मी लार्ड पर पर काफी कमेंट आए। बाद में लोगों ने दीपीवली के त्यौहार को मनाने के लिए दो साल पहले सोशल मीडिया पर मी..लार्ड के बयान की धज्जियां उड़ा दी। कुछ समय बीता उच्चतम न्यायालय के चार जज अंदर का झगड़ा सार्वजनिक तौर पर ले आए। सोशल मीडिया उच्चतम न्यायालय के जजों पर मर्यादा के पार जाकर टिप्पणी से भर गया। कुछ समय और बीता जस्टिस दीपक मिश्रा रिटायर हुए। जस्टिस रंजन गगोई ने कार्यभार संभाला। सोशल मीडिया ने जानकारी दी कि कांग्रेसी का बेटा देश का प्रधान न्यायाधीश बन गया। सीबीआई का झगड़ा शीर्ष अदालत में पहुंचा तो मानों सोशल मीडिया को पहले ही फैसले की जानकारी हो गई हो। जस्टिस सीकरी प्रधान न्यायाधीश द्वारा सीबीआई की चयन समिति की बैठक के लिए नॉमित किए गए तो सोशल मीडिया ने चयन समिति की बैठक का निर्णय आने के बाद तक अपना फैसला सुनाना बंद नहीं किया। राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर संघ से लेकर सबने उच्चतम न्यायालय को उसकी मर्यादा ही बता दी। अब जस्टिस एके सीकरी खुद सामने आए हैं। उन्होंने भी कहा कि इस तरह के प्रयासों से जजों पर भी उनके कामकाज में असर पड़ता है। सबकुछ बस एक चुनाव, एक सत्ता के लिए हो रहा है।

आखिर क्यों बिगड़ रही है भाषा, मर्यादा?

राजनीति के मर्मज्ञ रहे रजनी कोठारी कहा करते थे कि सत्ता में बड़ा आकर्षण होता है। यह जितना सुख लेकर आती है, उतना ही राजनीतिक जमीन के कमजोर होने का एहसास करने पर छलनी करती जाती है। कोठारी ने एक साक्षात्कार में बताया कि था जिसके पास सत्ता होती है, वह अपनी कमजोरी छिपाने के लिए विपक्ष पर हमलावर होने में मर्यादा भूल सकता है। ऐसा ही विपक्ष के साथ होता है। विपक्ष जवाब में उतना ही धारदार होता जाता है। इतना ही नहीं जिसके पास सत्ता होती है, उसके विरुद्ध विपक्ष में मौजूद दल भी सत्ता में हिस्सेदारी और अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए एकजुट होते चले जाते हैं। कोठारी के अनुसार यह राजनीति में ही होता है।

कहीं सरकार बदलने का संकेत तो नहीं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण का लोकसभा में जवाब देते हुए सात फरवरी को इसका संकेत दिया। पहली बार प्रधानमंत्री ने अगली सरकार के गठबंधन वाली सरकार होने की खुलकर संभावना जताई। भाजपा ने अबकी बार फिर मोदी सरकार का नारा दिया है, लेकिन प्रधानमंत्री सदन को बताया कि 30 साल बाद देश की जनता ने उनके नेतृत्व को पूर्ण बहुमत दिया। 2014 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन 30 सालों में देश में मिलावट वाली सरकार सत्ता में आई और अब महामिलावट वाली आने वाली है। प्रधानमंत्री ने हालांकि बाद में अपने भाषण में इसमें काफी सुधार किया, लेकिन राजनीतिक गलियारे में इसे कहीं न कहीं सत्ता पक्ष का डोल रहा आत्म विश्वास तो विपक्ष के लिए सत्ता मिलने का सपने देखने के तौर पर देखा जा रहा है।

मां-बेटे की सरकार, रिमोट कंट्रोल की सरकार, दामाद श्री, जमानत पर परिवार, जमानत पर पार्टी के रास्ते वंशवाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हमले बढ़ते गए तो जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने खुलकर कहना शुरू किया कि चौकीदार चोर है। बोला ही नहीं नारा भी लगवाया चौकीदार चोर है। प्रधानमंत्री ने गुंटूर में कहा कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अपने ससुर और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नंदमूरि तारक रामाराव के पीठे में छुरा घोंपा। चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी बाप-बेटे की पार्टी है।  

प्रधानमंत्री ने आरोप उछाला था तो जवाब भी आया। चंद्र बाबू नायडू ने जवाब दिया कि ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। इनकी एक पत्नी भी हैं, जसोदा बेन। प्रधानमंत्री परिवार का प्रेम और इसकी व्यवस्था को नहीं समझते। चंद्र बाबू नायडू इससे भी आगे बढ़े और चार साल तक एनडीए के साथ रहने वाले नायडू ने आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा न दिए जाने को प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया धोखा बताया। प्रधानमंत्री के पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप और जवाब में ममता बनर्जी की जुबान में तल्खी भी कोई कम नहीं है। यहां तक कि केन्द्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई के जवाब में कोलकाता पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह से संघीय ढांचे की चूल हिला देने वाली है।

अब राहुल हुए आक्रामक 

राहुल गांधी अब एक पार्टी के अध्यक्ष हैं। लेकिन इस पद पर बैठने के काफी समय बाद तक पप्पू कहे जाते रहे। प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी जनसभा में बिना नाम लिए कहा। नामदार कहा। फिर नाम लेकर बोले। प्रधानमंत्री ने वाराणसी की जनसभा में कांग्रेस अध्यक्ष की मिमिक्री भी की। जवाब में राहुल गांधी ने पहला ताना संसद में सूटबूट की सरकार का मारा। इसके बाद वह नहीं रुके। अभी पप्पू इस शब्द का प्रयोग नहीं हो रहा है। जवाब में विपक्ष प्रधानमंत्री को खुलकर जुमला राजा और प्रधानमंत्री को झूठा कहा। ऐसा नहीं है कि इस तरह के आरोप पहली बार लग रहे हैं। 1980 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को सीधे बोफोर्स दलाल कहा गया था। राजीव गांधी चोर है का नारा भी लगा था। अब उसी तर्ज पर कांग्रेस अध्यक्ष भी नारा लगवाते हैं कि देश का चौकीदार चोर है। पहले भाजपा के निशाने पर केवल राहुल गांधी थे। कांग्रेस के वह तमाम नेता थे जो किसी न किसी मामले में जांच एजेंसी के आरोप का सामना कर रहे थे। अब प्रियंका गांधी वाड्रा हैं। राहुल गांधी ने जवाब में पहले

राजनीति का नया दौर

यह राजनीति का नया दौर है, जब राजनीतिक दलों के प्रमुख एक दूसरे पर आरोप लगाने के साथ-साथ देश की संवैधानिक संस्थाओं को भी खुलकर निशाना बना रहे हैं। सीएजी पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया है। सीबीआई में दो अफसरों की लड़ाई और लड़ाई में प्रधानमंत्री कार्यालय का दखल ने विपक्ष को इस पर राजनीति करने की खुली छूट दे दी है। प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई, पूछताछ पर भी दलगत राजनीति ने बना भरोसा ने उठाना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय लोकदल के एक वरिष्ठ नेता सवाल उठाते हुए कहते हैं कि अभी तक कोई बड़ा मामला होने पर सीबीआई से जांच की मांग होती रही है। अब सीबीआई की ही साख पर सवाल है। इस सवाल को लेकर प्रधानमंत्री और सरकार के सामने लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े खड़े हैं। विपक्ष सीधे केन्द्र सरकार पर सरकारी संस्थाओं को लगातार कमजोर करने का आरोप लगा रहा है।