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संसदीय समिति के सामने ट्विटर के अलावा गूगल, फेसबुक की भी हो सकती है पेशी

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हाल ही में ट्विटर की टीम भारत में संसदीय समिति के सामने हाजिर हुई थी जिसके बाद सूचना प्रौद्योगिकी पर बनी संसदीय समिति के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा था कि कि समिति ने ट्विटर के प्रमुख और अन्य अधिकारियों को 25 फरवरी को उसके समक्ष पेश होने को कहा है। बता दें कि 11 फरवरी को हुई बैठक में ट्विटर के सीईओ जैक डॉर्सी शामिल नहीं हुए थे। वहीं अब समिति ने ट्विटर के अलावा गूगल, फेसबुक जैसी टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रमुख की भी पेशी की मांग की है। 

31 सदस्यीय समिति के सदस्यों को कहना है कि ट्विटर के अलावा भारत में कारोबार कर रही प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों की भी पेशी होनी चाहिए। बता दें कि 31 सदस्यों कि इस समिति में 21 लोकसभा सदस्य और 10 राज्यसभा सदस्य हैं। इस समिति में बीजीपी के 13 और कांग्रेस के 4 सांसद शामिल हैं। इस समिति में बीजेपी की ओर से लालकृष्ण आडवाणी भी हैं।

गूगल, फेसबुक और ट्विटर की पेशी क्यों चाहती है समिति?
दरअसल यह पूरा मामला इसी साल अप्रैल में लोकसभा चुनाव होने वाला है और ऐसे में सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के वायरल होने का डर है। इसी बात को लेकर इन कंपनियों के पेशी होने वाली है ताकि सोशल मीडिया और इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप पर फर्जी खबरों के फैलने पर रोक लगाने के लिए कोई रणनीति बनाई जाए।

गौरतलब है कि 11 फरवरी को भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर की अगुवाई वाली संसदीय समिति के कड़े रुख के बाद ट्विटर की टीम संसद पहुंची। इसमें ट्विटर इंडिया के भी प्रतिनिधि शामिल थे। हालांकि ट्विटर प्रमुख जैक डॉर्सी नहीं पहुंचे। वहीं, समिति ने इस टीम से मिलने से मना कर दिया और सीईओ के साथ 25 फरवरी को बुलाया। हालांकि ट्विटर ने अभी तक इस बात की जानकारी नहीं दी है कि 25 फरवरी को होने वाली बैठक में जैक डॉर्सी शामिल होंगे या नहीं।

हाल ही में ट्विटर की टीम भारत में संसदीय समिति के सामने हाजिर हुई थी जिसके बाद सूचना प्रौद्योगिकी पर बनी संसदीय समिति के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा था कि कि समिति ने ट्विटर के प्रमुख और अन्य अधिकारियों को 25 फरवरी को उसके समक्ष पेश होने को कहा है। बता दें कि 11 फरवरी को हुई बैठक में ट्विटर के सीईओ जैक डॉर्सी शामिल नहीं हुए थे। वहीं अब समिति ने ट्विटर के अलावा गूगल, फेसबुक जैसी टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रमुख की भी पेशी की मांग की है। 

31 सदस्यीय समिति के सदस्यों को कहना है कि ट्विटर के अलावा भारत में कारोबार कर रही प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों की भी पेशी होनी चाहिए। बता दें कि 31 सदस्यों कि इस समिति में 21 लोकसभा सदस्य और 10 राज्यसभा सदस्य हैं। इस समिति में बीजीपी के 13 और कांग्रेस के 4 सांसद शामिल हैं। इस समिति में बीजेपी की ओर से लालकृष्ण आडवाणी भी हैं।

गूगल, फेसबुक और ट्विटर की पेशी क्यों चाहती है समिति?
दरअसल यह पूरा मामला इसी साल अप्रैल में लोकसभा चुनाव होने वाला है और ऐसे में सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के वायरल होने का डर है। इसी बात को लेकर इन कंपनियों के पेशी होने वाली है ताकि सोशल मीडिया और इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप पर फर्जी खबरों के फैलने पर रोक लगाने के लिए कोई रणनीति बनाई जाए।

गौरतलब है कि 11 फरवरी को भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर की अगुवाई वाली संसदीय समिति के कड़े रुख के बाद ट्विटर की टीम संसद पहुंची। इसमें ट्विटर इंडिया के भी प्रतिनिधि शामिल थे। हालांकि ट्विटर प्रमुख जैक डॉर्सी नहीं पहुंचे। वहीं, समिति ने इस टीम से मिलने से मना कर दिया और सीईओ के साथ 25 फरवरी को बुलाया। हालांकि ट्विटर ने अभी तक इस बात की जानकारी नहीं दी है कि 25 फरवरी को होने वाली बैठक में जैक डॉर्सी शामिल होंगे या नहीं।