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माल्या ने प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ अपील करने की इजाजत मांगी

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भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या ने यूके हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी है। माल्या ने प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर होने के दस दिन बाद बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट के प्रशासनिक कोर्ट विभाग में आवेदन किया। यूके कोर्ट के प्रतिनिधि ने बताया कि माल्या की अर्जी को जज के पास भेजा गया है और इस पर दो से चार सप्ताह में फैसला होगा। अगर उनकी अर्जी को स्वीकार कर लिया जाता है तो अगले कुछ महीनों में मामला सुनवाई के लिए आगे बढ़ेगा। 

प्रतिनिधि के मुताबिक, अगर माल्या की अर्जी खारिज हो जाती है तो उसके पास रिन्यूवल फॉर्म दाखिल करने का विकल्प होगा। इस प्रक्रिया के दौरान 30 मिनट की मौखिक सुनवाई होगी। लंदन के रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस में होने वाली सुनवाई की प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं क्योंकि सुनवाई का सूचीबद्ध होना जजों की उपलब्धता और कई कारणों पर निर्भर करेगा। हाईकोर्ट से फैसला होने के बाद दोनों पक्षों के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार होगा। अगर ऐसा होता है तो इसमें कम से कम छह हफ्ते का समय और लगेगा। हालांकि यह प्रक्रिया काफी जटिल है क्योंकि हाईकोर्ट को यह प्रमाणित करना होगा कि अपील में सार्वजनिक महत्व का बिंदु शामिल है। 

4 फरवरी को प्रत्यर्पण को मिली थी मंजूरी
 
ब्रिटेन के गृह सचिव साजिद जावेद ने 4 फरवरी को माल्या के प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। माल्या पर करीब 9000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। वह 2016 से ब्रिटेन में है और 2017 से स्कॉटलैंड यार्ड द्वारा जारी प्रत्यर्पण वारंट पर जमानत पर हैं। 

भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या ने यूके हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी है। माल्या ने प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर होने के दस दिन बाद बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट के प्रशासनिक कोर्ट विभाग में आवेदन किया। यूके कोर्ट के प्रतिनिधि ने बताया कि माल्या की अर्जी को जज के पास भेजा गया है और इस पर दो से चार सप्ताह में फैसला होगा। अगर उनकी अर्जी को स्वीकार कर लिया जाता है तो अगले कुछ महीनों में मामला सुनवाई के लिए आगे बढ़ेगा। 

प्रतिनिधि के मुताबिक, अगर माल्या की अर्जी खारिज हो जाती है तो उसके पास रिन्यूवल फॉर्म दाखिल करने का विकल्प होगा। इस प्रक्रिया के दौरान 30 मिनट की मौखिक सुनवाई होगी। लंदन के रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस में होने वाली सुनवाई की प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं क्योंकि सुनवाई का सूचीबद्ध होना जजों की उपलब्धता और कई कारणों पर निर्भर करेगा। हाईकोर्ट से फैसला होने के बाद दोनों पक्षों के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार होगा। अगर ऐसा होता है तो इसमें कम से कम छह हफ्ते का समय और लगेगा। हालांकि यह प्रक्रिया काफी जटिल है क्योंकि हाईकोर्ट को यह प्रमाणित करना होगा कि अपील में सार्वजनिक महत्व का बिंदु शामिल है। 

4 फरवरी को प्रत्यर्पण को मिली थी मंजूरी
 
ब्रिटेन के गृह सचिव साजिद जावेद ने 4 फरवरी को माल्या के प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। माल्या पर करीब 9000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। वह 2016 से ब्रिटेन में है और 2017 से स्कॉटलैंड यार्ड द्वारा जारी प्रत्यर्पण वारंट पर जमानत पर हैं। 

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