The news is by your side.
Loading...

निर्मला सीतारमण ने कहा- एस-400 मिसाइल पर अमेरिका ने मानी भारत की बात

0

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 13 Apr 2019 12:59 PM IST

Related Posts

ख़बर सुनें

भारत को उम्मीद है कि अमेरिका उसपर रूस से एस-400 मिसाइल खरीदने को लेकर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाएगा। रक्षा मंत्री सीतारमण ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन ने हमारी बात को सुना और समझा है। रूस के साथ भारत ने 5.2 बिलियन यानी तीन अरब में एस-400 सर्फेस टू एयर मिसाइल सिस्टम का सौदा किया है। यह बातें उन्होंने एक इंटरव्यू में कहीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल अक्तूबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ इस सौदे पर हस्ताक्षर किए थे। अमेरिका ने काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सरीज थ्रू सेंक्शंस एक्ट (काट्सा) नियम के अंतर्गत सभी देशों के रूस से हथियार खरीदने पर रोक लगाई हुई है। ऐसा 2014 में यूक्रेन में रूस द्वारा की गई कार्रवाई की वजह से हुआ है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने चीनी सेना पर पिछले साल प्रतिबंध लगाया था क्योंकि उन्होंने रूस से एस-400 और दूसरे सैन्य हार्डवेयर खरीदे थे। अमेरिका ने नाटो सदस्य तुर्की को एस-400 खरीदने पर चेतावनी दी थी और अमेरिकी जेट कार्यक्रम में उसकी भागीदारी को निलंबित कर दिया है।

सीतारमण ने कहा कि अमेरिका ने इस बात को माना कि भारत की सीमा पाकिस्तान और चीन दोनों से लगती है। ऐसे में उसे मजबूत साझेदार बने रहने के लिए रूस और अन्य देशों से हथियार चाहिए। रूस के साथ एस-400 सौदे के लिए बातचीत अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने से पहले से चल रही थी।

रक्षामंत्री ने कहा, एस-400 के मामले में हमने अपनी बात को अच्छी तरह से समझाया। जिसे अमेरिका ने सुना और समझा। उन्होंने हमारी बात को सराहा। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि भारत पर प्रतिबंध नहीं लगेंगे तो उन्होंने कहा, ‘हां मुझे उम्मीद है।’

इस मिसाइल के जरिए भारत 380 किलोमीटर की दूरी तक बॉम्बर्स, जेट्स, जासूस विमानों, मिसाइलों और ड्रोन्स का पता लगाकर उन्हें तबाह कर सकता है। इसके जरिए भारत अपनी हवाई रक्षा को मजबूती प्रदान करना चाहता है। इन्हें चीन, पाकिस्तान के साथ ही नई दिल्ली में तैनात किया जाएगा। भारत ने साल 2015 में इस मिलाइल सौदे की प्रक्रिया को शुरू किया था। वहीं केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति ने इसे पिछले साल 26 सितंबर को मंजूरी दी थी।

भारत को उम्मीद है कि अमेरिका उसपर रूस से एस-400 मिसाइल खरीदने को लेकर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाएगा। रक्षा मंत्री सीतारमण ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन ने हमारी बात को सुना और समझा है। रूस के साथ भारत ने 5.2 बिलियन यानी तीन अरब में एस-400 सर्फेस टू एयर मिसाइल सिस्टम का सौदा किया है। यह बातें उन्होंने एक इंटरव्यू में कहीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल अक्तूबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ इस सौदे पर हस्ताक्षर किए थे। अमेरिका ने काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सरीज थ्रू सेंक्शंस एक्ट (काट्सा) नियम के अंतर्गत सभी देशों के रूस से हथियार खरीदने पर रोक लगाई हुई है। ऐसा 2014 में यूक्रेन में रूस द्वारा की गई कार्रवाई की वजह से हुआ है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने चीनी सेना पर पिछले साल प्रतिबंध लगाया था क्योंकि उन्होंने रूस से एस-400 और दूसरे सैन्य हार्डवेयर खरीदे थे। अमेरिका ने नाटो सदस्य तुर्की को एस-400 खरीदने पर चेतावनी दी थी और अमेरिकी जेट कार्यक्रम में उसकी भागीदारी को निलंबित कर दिया है।

सीतारमण ने कहा कि अमेरिका ने इस बात को माना कि भारत की सीमा पाकिस्तान और चीन दोनों से लगती है। ऐसे में उसे मजबूत साझेदार बने रहने के लिए रूस और अन्य देशों से हथियार चाहिए। रूस के साथ एस-400 सौदे के लिए बातचीत अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने से पहले से चल रही थी।

रक्षामंत्री ने कहा, एस-400 के मामले में हमने अपनी बात को अच्छी तरह से समझाया। जिसे अमेरिका ने सुना और समझा। उन्होंने हमारी बात को सराहा। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि भारत पर प्रतिबंध नहीं लगेंगे तो उन्होंने कहा, ‘हां मुझे उम्मीद है।’

इस मिसाइल के जरिए भारत 380 किलोमीटर की दूरी तक बॉम्बर्स, जेट्स, जासूस विमानों, मिसाइलों और ड्रोन्स का पता लगाकर उन्हें तबाह कर सकता है। इसके जरिए भारत अपनी हवाई रक्षा को मजबूती प्रदान करना चाहता है। इन्हें चीन, पाकिस्तान के साथ ही नई दिल्ली में तैनात किया जाएगा। भारत ने साल 2015 में इस मिलाइल सौदे की प्रक्रिया को शुरू किया था। वहीं केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति ने इसे पिछले साल 26 सितंबर को मंजूरी दी थी।

Loading...
Comments
Loading...