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घर खरीदारों के लिए बड़ी खुशखबरी, पजेशन में हुई देरी तो बिल्डर वापस करेगा सारा पैसा

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राष्ट्रीय विवाद निवारण आयोग ने घर खरीदारों को एक बड़ी खुशखबरी दी है। इस नई सुविधा के तहत, जिन खरीदारों को एक साल में उनके घर या फ्लैट का पजेशन नहीं मिला है, उन्हें अब रिफंड मिलेगा। इससे पहले भी उच्चतम न्यायालय सहित कई न्यायिक संस्थाएं पजेशन में देरी पर रिफंड का दावा करने की बात कह चुकी हैं।

दरअसल गुरुग्राम के अल्ट्रा लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट ग्रीनपोलिस में शलभ निगम नामक एक शख्स ने साल 2012 में एक फ्लौट बुक किया था। इस फ्लैट का दाम एक करोड़ रुपये था और बुकिंग का समय 36 महीने था। 90 लाख रुपये का भुगतान करने के बावजूद निगम को समय पर फ्लैट नहीं मिला था। इसलिए निगम ने राष्ट्रीय विवाद निवारण आयोग में याचिका दायर की थी।

आयोग ने सुनाया ये फैसला

मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने घर खरीदारों के हित में फैसला सुनाया है। आयोग का कहना है कि अगर पजेशन तारीख के एक साल बाद भी खरीदार को उसका घर नहीं मिलता है, तो उसे अपना रिफंड मिल जाएगा। इस मामले पर आयोग ने कहा कि अगर खरीदार घर लेना चाहता है तो उसे सितंबर 2019 तक पजेशन दे दी जाए। अगर अब पजेशन में देरी हुई तो खरीदार को बिल्डर की ओर से छह फीसदी वार्षिक की दर से मुआवजा प्राप्त होगा। वहीं अगर खरीदार पजेशन में देरी पर रिफंड लेना चाहता है तो बिल्डर को 10 फीसदी ब्याज के साथ धनराशि देनी होगी। 

राष्ट्रीय विवाद निवारण आयोग ने घर खरीदारों को एक बड़ी खुशखबरी दी है। इस नई सुविधा के तहत, जिन खरीदारों को एक साल में उनके घर या फ्लैट का पजेशन नहीं मिला है, उन्हें अब रिफंड मिलेगा। इससे पहले भी उच्चतम न्यायालय सहित कई न्यायिक संस्थाएं पजेशन में देरी पर रिफंड का दावा करने की बात कह चुकी हैं।

दरअसल गुरुग्राम के अल्ट्रा लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट ग्रीनपोलिस में शलभ निगम नामक एक शख्स ने साल 2012 में एक फ्लौट बुक किया था। इस फ्लैट का दाम एक करोड़ रुपये था और बुकिंग का समय 36 महीने था। 90 लाख रुपये का भुगतान करने के बावजूद निगम को समय पर फ्लैट नहीं मिला था। इसलिए निगम ने राष्ट्रीय विवाद निवारण आयोग में याचिका दायर की थी।

आयोग ने सुनाया ये फैसला

मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने घर खरीदारों के हित में फैसला सुनाया है। आयोग का कहना है कि अगर पजेशन तारीख के एक साल बाद भी खरीदार को उसका घर नहीं मिलता है, तो उसे अपना रिफंड मिल जाएगा। इस मामले पर आयोग ने कहा कि अगर खरीदार घर लेना चाहता है तो उसे सितंबर 2019 तक पजेशन दे दी जाए। अगर अब पजेशन में देरी हुई तो खरीदार को बिल्डर की ओर से छह फीसदी वार्षिक की दर से मुआवजा प्राप्त होगा। वहीं अगर खरीदार पजेशन में देरी पर रिफंड लेना चाहता है तो बिल्डर को 10 फीसदी ब्याज के साथ धनराशि देनी होगी। 

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