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मंगल के बाद अब शुक्र की तैयारी में इसरो, अगले 10 साल में लॉन्च होंगे सात वैज्ञानिक मिशन

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 18 May 2019 12:55 PM IST

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भारत के छह साल पहले मंगल ग्रह पर जाने के बाद अब इसरो की मिशन शुक्र ग्रह (वीनस) की तैयारी है। इसरो ने अगले 10 वर्षों में सात वैज्ञानिक मिशन की योजना बनाई है, जिसमें 2023 में शुक्र ग्रह की तारीख भी शामिल है। 

अगले दस सालों में 2020 में ब्रह्मंडीय विकिरण का अध्ययन करने के लिए एक्सपोसेट, 2021 में सूर्य के लिए एल1, 2022 में मंगल मिशन-2, 2024 में चंद्रयान-3 और 2028 में सौरमंडल के बाहर एक खोज इसरो की सूची में शामिल हैं। 

आकार, संरचना और घनत्व में समान होने की वजह से शुक्र ग्रह को पृथ्वी की जुड़वां बहन माना जाता है। मिशन शुक्र ग्रह, वहां की सतह और इसकी उप-सतह, वायुमंडलीय रसायन विज्ञान और सौर हवाओं के अध्ययन पर केंद्रित होगा। इसरो के अध्यक्ष के सिवन ने कहा कि ये उत्साह से भरा हुआ मिशन है। 

सिवन ने शुक्रवार को श्रीहरिकोटा में 108 स्कूली छात्रों को युविका-2019 के युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कहा, हमें दुनिया भर से शानदार प्रतिक्रिया मिली है और हमारी 20 से अधिक पेलोड की योजना है। 

इसरो अध्यक्ष ने आगे कहा कि आदित्य एल1 और एक्सपोसेट मिशन परिभाषित किए गए हैं। बाकी योजना चरणों में हैं। सिवन के अनुसार अदित एल1, सूर्य मिशन पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन को समझने और भविष्यवाणी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

 

भारत के छह साल पहले मंगल ग्रह पर जाने के बाद अब इसरो की मिशन शुक्र ग्रह (वीनस) की तैयारी है। इसरो ने अगले 10 वर्षों में सात वैज्ञानिक मिशन की योजना बनाई है, जिसमें 2023 में शुक्र ग्रह की तारीख भी शामिल है। 

अगले दस सालों में 2020 में ब्रह्मंडीय विकिरण का अध्ययन करने के लिए एक्सपोसेट, 2021 में सूर्य के लिए एल1, 2022 में मंगल मिशन-2, 2024 में चंद्रयान-3 और 2028 में सौरमंडल के बाहर एक खोज इसरो की सूची में शामिल हैं। 

आकार, संरचना और घनत्व में समान होने की वजह से शुक्र ग्रह को पृथ्वी की जुड़वां बहन माना जाता है। मिशन शुक्र ग्रह, वहां की सतह और इसकी उप-सतह, वायुमंडलीय रसायन विज्ञान और सौर हवाओं के अध्ययन पर केंद्रित होगा। इसरो के अध्यक्ष के सिवन ने कहा कि ये उत्साह से भरा हुआ मिशन है। 

सिवन ने शुक्रवार को श्रीहरिकोटा में 108 स्कूली छात्रों को युविका-2019 के युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कहा, हमें दुनिया भर से शानदार प्रतिक्रिया मिली है और हमारी 20 से अधिक पेलोड की योजना है। 

इसरो अध्यक्ष ने आगे कहा कि आदित्य एल1 और एक्सपोसेट मिशन परिभाषित किए गए हैं। बाकी योजना चरणों में हैं। सिवन के अनुसार अदित एल1, सूर्य मिशन पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन को समझने और भविष्यवाणी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

 

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