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अमेरिका-ईरान तनाव : फारस की खाड़ी पर विमानों को खतरा

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सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : सोशल मीडिया

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अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव गहराता जा रहा है। अमेरिकी राजनयिकों ने शनिवार को चेतावनी देकर बताया कि फारस की खाड़ी के ऊपर से गुजरने वाले वाणिज्यिक विमानों को खतरे का सामना करना पड़ सकता है। फेडरल एविएशन एडमिमिस्ट्रेशन (एफएए) द्वारा जारी चेतावनी में कहा गया कि खाड़ी से उड़ान भरने वाले विमान गलत पहचान का शिकार हो सकते हैं। 

कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात में तैनात अमेरिकी राजनयिकों ने कहा कि फारस और ओमान की खाड़ी से गुजरने वाली सभी वाणिज्यिक उड़ानों को सैन्य गतिविधियों और राजनीतिक तनाव के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है। इस चेतावनी में इन विमानों के नेविगेशन तंत्र और संचार में खलल पड़ने की आशंका व्यक्त की गई है। 

अमेरिका ने बढ़ा दी सैन्य तैनाती

हाल ही में  ‘लॉयड ऑफ लंदन’ ने भी समुद्री जहाजों के लिए इस क्षेत्र में खतरे के प्रति आगाह किया था। कुछ दिनों पहले अमेरिका ने ईरान से संभावित हमले की जवाबी कार्रवाई के लिए क्षेत्र में बमवर्षक और युद्धपोत की तैनाती की थी। इसके बाद दोनों देशों में खींचतान और बढ़ गई थी। इसी बीच अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि संयुक्त अरब के तट पर तेल के चार टैंकरों को निशाना बनाया गया और ईरान की ओर झुकाव वाले विद्रोहियों ने महत्वपूर्ण सऊदी तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले की जिम्मेदारी ली थी। सऊदी अरब ने इस ड्रोन हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया था और शाही परिवार से जुड़े एक अखबार ने तेहरान पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने की बात सुझाई। 

तनाव की वजह ट्रंप का निर्णय

ईरान के साथ मौजूदा तनाव की बड़ी वजह अमेरिका का 2015 की परमाणु हटना रहा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और वैश्विक ताकतों के बीच हुई संधि से पिछले साल खुद को अलग कर लिया था। ओबामा प्रशासन के समय ईरान से इस संधि पर सहमति बनी थी। ट्रंप के निर्णय के बाद ईरान पर अमेरिका ने एक बार फिर सख्त प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके बाद ईरान ने परमाणु संधि की शर्तों से हटने की घोषणा करते हुए यूरोप को 60 दिन के भीतर नई शर्तें बनाने की बात कही। वरना यूरेनियम को हथियार स्तर तक उन्नत करने की धमकी दी। तेहरान इस बात पर जोर देता रहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा लेकिन पश्चिमी देशों को उस पर भरोसा नहीं है।

अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव गहराता जा रहा है। अमेरिकी राजनयिकों ने शनिवार को चेतावनी देकर बताया कि फारस की खाड़ी के ऊपर से गुजरने वाले वाणिज्यिक विमानों को खतरे का सामना करना पड़ सकता है। फेडरल एविएशन एडमिमिस्ट्रेशन (एफएए) द्वारा जारी चेतावनी में कहा गया कि खाड़ी से उड़ान भरने वाले विमान गलत पहचान का शिकार हो सकते हैं। 

कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात में तैनात अमेरिकी राजनयिकों ने कहा कि फारस और ओमान की खाड़ी से गुजरने वाली सभी वाणिज्यिक उड़ानों को सैन्य गतिविधियों और राजनीतिक तनाव के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है। इस चेतावनी में इन विमानों के नेविगेशन तंत्र और संचार में खलल पड़ने की आशंका व्यक्त की गई है। 

अमेरिका ने बढ़ा दी सैन्य तैनाती

हाल ही में  ‘लॉयड ऑफ लंदन’ ने भी समुद्री जहाजों के लिए इस क्षेत्र में खतरे के प्रति आगाह किया था। कुछ दिनों पहले अमेरिका ने ईरान से संभावित हमले की जवाबी कार्रवाई के लिए क्षेत्र में बमवर्षक और युद्धपोत की तैनाती की थी। इसके बाद दोनों देशों में खींचतान और बढ़ गई थी। इसी बीच अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि संयुक्त अरब के तट पर तेल के चार टैंकरों को निशाना बनाया गया और ईरान की ओर झुकाव वाले विद्रोहियों ने महत्वपूर्ण सऊदी तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले की जिम्मेदारी ली थी। सऊदी अरब ने इस ड्रोन हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया था और शाही परिवार से जुड़े एक अखबार ने तेहरान पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने की बात सुझाई। 

तनाव की वजह ट्रंप का निर्णय

ईरान के साथ मौजूदा तनाव की बड़ी वजह अमेरिका का 2015 की परमाणु हटना रहा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और वैश्विक ताकतों के बीच हुई संधि से पिछले साल खुद को अलग कर लिया था। ओबामा प्रशासन के समय ईरान से इस संधि पर सहमति बनी थी। ट्रंप के निर्णय के बाद ईरान पर अमेरिका ने एक बार फिर सख्त प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके बाद ईरान ने परमाणु संधि की शर्तों से हटने की घोषणा करते हुए यूरोप को 60 दिन के भीतर नई शर्तें बनाने की बात कही। वरना यूरेनियम को हथियार स्तर तक उन्नत करने की धमकी दी। तेहरान इस बात पर जोर देता रहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा लेकिन पश्चिमी देशों को उस पर भरोसा नहीं है।

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