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1983 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा था ये खिलाड़ी, लेकिन नहीं खेल पाया एक भी मैच

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पूर्व तेज गेंदबाज सुनील वाल्सन ऐतिहासिक 1983 विश्व कप खिताबी जीत दर्ज करने वाले भारतीय दल में एक भी मैच नहीं खेलने वाले एकमात्र सदस्य थे, लेकिन इसके बावजूद वह भावनात्मक रूप से टीम से मजबूत जुड़ाव महसूस करते हैं। इंग्लैंड में विश्व कप के शुरुआती मैच से 12 दिन पहले जब उन्हें फोन किया गया तो वह फोन करने का कारण जानते थे। वह हमेशा इस पर मजाक भी उड़ाते हैं, हालांकि इसमें कोई व्यंग्य नहीं था। उन्होंने कहा, ‘‘मैं जानता हूं कि हर चार साल में मुझे फोन (इंटरव्यू के लिए) किया जाता है।’’ 

वह 1983 प्रुडेंशियल विश्व कप की यादों को ताजा करने के लिए तैयार थे। यह पूछने कि क्या उन्हें इस बात से दुख होता है कि वह 14 में से एकमात्र खिलाड़ी ऐसे थे, जो उस विश्व कप में नहीं खेले थे? अपने समय के सबसे तेज भारतीयों गेंदबाजों में से शायद एक वाल्सन ने कहा, ‘‘बिलकुल भी नहीं। जब मैं युवा था, तब भी दुख नहीं हुआ और अब मैं वरिष्ठ नागरिक हो चुका हूं तब भी दुख नहीं होता। टीम में 14 खिलाड़ी थे, जिन्होंने विश्व कप जीता था और मैं इन 14 में से एक था। यह चीज कोई भी मुझसे नहीं ले सकता।’’ 
 

वाल्सन को जब विश्व कप टीम में चयन के बारे में फोन आया था तो वह इंग्लैंड में खेल रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं तब डरहम वेस्ट कोस्ट लीग में खेल रहा था, तब क्लब के एक अधिकारी ने मुझे मेरे चयन की सूचना दी। तब इंटरनेट का जमाना नहीं था, तो पुष्टि करना मुश्किल था। मैंने कीर्ति (आजाद) को फोन किया वो भी क्लब क्रिकेट खेल रहे थे और उन्होंने इसकी पुष्टि की। लेकिन मैं जानता था कि अंतिम एकादश में जगह बनाना मुश्किल होगा।’’ वह ऑस्ट्रेलिया और एक काउंटी टीम के खिलाफ दो अभ्यास मैचों में खेले थे। 

वाल्सन ने कहा, ‘‘हमने दोनों मैच गंवा दिए और एक कमजोर काउंटी टीम के खिलाफ था। तब प्रेस कवरेज भी कम होती थी, हमने विश्व कप के पहले मैच में वेस्टइंडीज को हरा दिया और सब कुछ बदल गया।’’ क्या उन्हें कप्तान कपिल देव से कोई संकेत नहीं मिला कि वह कम से कम एक मैच तो खेल सकते हैं? उन्होंने कहा, ‘‘हां, एक मैच था। वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरा राउंड रोबिन मैच जो हम (66 रन से) हार गए थे। मुझे मैदान (ओवल) याद नहीं।’’

वाल्सन ने याद करते हुए कहा, ‘‘अगर मुझे सही से याद है तो रोजर को कुछ हल्की सी चोट थी (हैमस्ट्रिंग या पिंडली की), मुझे अच्छी तरह याद नहीं। कपिल ने कहा कि अगर रोजर फिटनेस परीक्षण में विफल होता है तो मैं खेलूंगा। इतने से मौके के लिए कौन उत्साहित नहीं हो जाता।’’ लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ क्योंकि बिन्नी फिट रहे। 

उन्होंने कहा, ‘‘तब फिटनेस परीक्षण में जांगिंग का एक राउंड, थोड़ा सा दौड़ना और कुछ गेंद शामिल होती थी। जैसे ही रोजर ने भागना शुरू किया, मुझे पता था मैं नहीं खेलूंगा। रोजर अच्छी फॉर्म में था और ठीक भी था. कि कपिल, रोजर और मदन सभी मैचों में खेले।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मुझे मैदान में जाने का मौका मिला क्योंकि दिलीप वेंगसरकर को मैल्कम मार्शल की गेंद लग गई थी और मैं उन्हें ड्रेसिंग रूम में ले जाने के लिए गया था। मैल्कम 1983 में अविश्वसनीय थे। हमने किसी को इतनी तेज गेंदबाजी करते हुए कभी नहीं देखा था। ’’

पूर्व तेज गेंदबाज सुनील वाल्सन ऐतिहासिक 1983 विश्व कप खिताबी जीत दर्ज करने वाले भारतीय दल में एक भी मैच नहीं खेलने वाले एकमात्र सदस्य थे, लेकिन इसके बावजूद वह भावनात्मक रूप से टीम से मजबूत जुड़ाव महसूस करते हैं। इंग्लैंड में विश्व कप के शुरुआती मैच से 12 दिन पहले जब उन्हें फोन किया गया तो वह फोन करने का कारण जानते थे। वह हमेशा इस पर मजाक भी उड़ाते हैं, हालांकि इसमें कोई व्यंग्य नहीं था। उन्होंने कहा, ‘‘मैं जानता हूं कि हर चार साल में मुझे फोन (इंटरव्यू के लिए) किया जाता है।’’ 

वह 1983 प्रुडेंशियल विश्व कप की यादों को ताजा करने के लिए तैयार थे। यह पूछने कि क्या उन्हें इस बात से दुख होता है कि वह 14 में से एकमात्र खिलाड़ी ऐसे थे, जो उस विश्व कप में नहीं खेले थे? अपने समय के सबसे तेज भारतीयों गेंदबाजों में से शायद एक वाल्सन ने कहा, ‘‘बिलकुल भी नहीं। जब मैं युवा था, तब भी दुख नहीं हुआ और अब मैं वरिष्ठ नागरिक हो चुका हूं तब भी दुख नहीं होता। टीम में 14 खिलाड़ी थे, जिन्होंने विश्व कप जीता था और मैं इन 14 में से एक था। यह चीज कोई भी मुझसे नहीं ले सकता।’’ 
 


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