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300 बेड के अस्पताल को 500 करने की मिली मंजूरी, जीबीयू में होगी पढ़ाई, 8 विभाग तैयार

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कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान को मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलने के बाद शिक्षण कार्य जीबीयू में होगा। पूर्व वाइस चांसलर डॉ. प्रभात कुमार ने शासन से स्वीकृति के बाद बौद्ध दर्शन विभाग को पढ़ाई के लिए तैयार करने के लिए दे दिया। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान की पूर्व निदेशक डॉ. संगीता अनेजा ने आठ विभाग बायोकेमेस्ट्री, ऑटोनॉमी, फिजियोलॉजी, फार्माक्लॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, कम्यूनिटी मेडिसिन, फॉरेंसिक और पैथोलॉजी तैयार करवाया। निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि बहुत से अधूरे उपकरण और जरूरतों को पूरा करने के बाद अब विभाग शिक्षण के लिए तैयार है। दूसरी तरफ  300 बेड के अस्पताल की क्षमता बढ़ाकर 500 बेड कर दी गई है। तैयारियां तेजी से चल रही हैं। वर्तमान में 21 विभाग की ओपीडी और इंडोर सुविधा है। प्रतिदिन  हजार से 1500 तक मरीज आ रहे हैं। सोमवार से बुधवार के बीच यह आंकड़ा 1900 तक पहुंच जाता है। 

लाइब्रेरी और क्लासरूम तैयार
कॉलेज में जरूरी विभागों की लेबोरेटरी, क्लासरूम, डिसक्शन रूम, प्रोजेक्टर एंड एलईडी टीवी के साथ हॉल बनाए गए हैं। इनमें उपकरण भी लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा लाइब्रेरी भी बनाई गई है। लाइब्रेरी में मेडिकल की पुस्तकें नहीं मिल पाने पर कंप्यूटर इंटरनेट से उन विषयों को पढ़ा जा सकता है। 

हास्टल में रहेंगे विद्यार्थी
एक अगस्त से शुरू हो रहे सेशन के लिए विद्यार्थियों के लिए जीबीयू का आधा हॉस्टल दिया गया है। 400 विद्यार्थियों के लिए इंतजाम है। हालांकि, पहले वर्ष मात्र 100 ही छात्र आने हैं। वहीं, फैकल्टी के लिए जीबीयू की फैकल्टी के लिए उपलब्ध घर और फ्लैट दिए गए हैं। 

56 एकड़ भूमि पर बनेगी नई इमारत
आठ अप्रैल को प्रदेश सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल ने जीबीयू में मेडिकल कॉलेज की नई इमारत के लिए निरीक्षण किया था। अब इसकी प्रक्रिया में तेजी आएगी। 

डॉक्टरों और विद्यार्थियों को मिलेगा फ्री वाईफाई
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों और विद्यार्थियों के लिए फ्री वाई-फाई की सुविधा है। इसके अलावा जीबीयू में स्थित मेडिकल कॉलेज और कासना स्थित अस्पताल तक जाने वाली रोड जोड़ी जाएगी। ताकि डॉक्टर और विद्यार्थी सीधे कॉलेज, हॉस्टल से अस्पताल तक आ सकें। 

कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान को मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलने के बाद शिक्षण कार्य जीबीयू में होगा। पूर्व वाइस चांसलर डॉ. प्रभात कुमार ने शासन से स्वीकृति के बाद बौद्ध दर्शन विभाग को पढ़ाई के लिए तैयार करने के लिए दे दिया। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान की पूर्व निदेशक डॉ. संगीता अनेजा ने आठ विभाग बायोकेमेस्ट्री, ऑटोनॉमी, फिजियोलॉजी, फार्माक्लॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, कम्यूनिटी मेडिसिन, फॉरेंसिक और पैथोलॉजी तैयार करवाया। निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि बहुत से अधूरे उपकरण और जरूरतों को पूरा करने के बाद अब विभाग शिक्षण के लिए तैयार है। दूसरी तरफ  300 बेड के अस्पताल की क्षमता बढ़ाकर 500 बेड कर दी गई है। तैयारियां तेजी से चल रही हैं। वर्तमान में 21 विभाग की ओपीडी और इंडोर सुविधा है। प्रतिदिन  हजार से 1500 तक मरीज आ रहे हैं। सोमवार से बुधवार के बीच यह आंकड़ा 1900 तक पहुंच जाता है। 

लाइब्रेरी और क्लासरूम तैयार
कॉलेज में जरूरी विभागों की लेबोरेटरी, क्लासरूम, डिसक्शन रूम, प्रोजेक्टर एंड एलईडी टीवी के साथ हॉल बनाए गए हैं। इनमें उपकरण भी लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा लाइब्रेरी भी बनाई गई है। लाइब्रेरी में मेडिकल की पुस्तकें नहीं मिल पाने पर कंप्यूटर इंटरनेट से उन विषयों को पढ़ा जा सकता है। 

हास्टल में रहेंगे विद्यार्थी
एक अगस्त से शुरू हो रहे सेशन के लिए विद्यार्थियों के लिए जीबीयू का आधा हॉस्टल दिया गया है। 400 विद्यार्थियों के लिए इंतजाम है। हालांकि, पहले वर्ष मात्र 100 ही छात्र आने हैं। वहीं, फैकल्टी के लिए जीबीयू की फैकल्टी के लिए उपलब्ध घर और फ्लैट दिए गए हैं। 

56 एकड़ भूमि पर बनेगी नई इमारत
आठ अप्रैल को प्रदेश सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल ने जीबीयू में मेडिकल कॉलेज की नई इमारत के लिए निरीक्षण किया था। अब इसकी प्रक्रिया में तेजी आएगी। 

डॉक्टरों और विद्यार्थियों को मिलेगा फ्री वाईफाई
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों और विद्यार्थियों के लिए फ्री वाई-फाई की सुविधा है। इसके अलावा जीबीयू में स्थित मेडिकल कॉलेज और कासना स्थित अस्पताल तक जाने वाली रोड जोड़ी जाएगी। ताकि डॉक्टर और विद्यार्थी सीधे कॉलेज, हॉस्टल से अस्पताल तक आ सकें। 

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