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मोदी की पावरफुल अफसर लॉबी में भी दिखेंगे नए चेहरे, डोभाल होंगे बॉस…

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जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 25 May 2019 12:02 AM IST

नरेंद्र मोदी, अजीत डोभाल (फाइल फोटो)
– फोटो : सोशल मीडिया

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दूसरी बार प्रचंड बहुमत लेकर प्रधानमंत्री बनने जा रहे नरेंद्र मोदी की पावरफुल अफसर लॉबी में भी इस दफा नए चेहरे देखने को मिलेंगे। यह तय है कि इस बार भी राष्ट्रीय सुरक्षा सुलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ही अफसरों की इस लॉबी के केंद्र में रहेंगे। पीएमओ के अलावा देश की आंतरिक खुफिया एजेंसी आईबी और विदेशी मामलों की खुफिया एजेंसी रॉ के चीफ भी अगले माह तक बदल दिए जाएंगे। जम्मू-कश्मीर को लेकर सरकार पहले से ही गंभीर है, वहां नई रणनीति के तहत राज्यपाल के सलाहकार पद पर नई नियुक्तियां किए जाने की चर्चा है।

बता दें कि रॉ चीफ अनिल धस्माना, जो कि मध्यप्रदेश कॉडर के 1981 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, उनका कार्यकाल दिसंबर-18 में खत्म हो गया था। इसी तरह आईबी डायरेक्टर राजीव जैन, जो कि झारखंड कॉडर के 1980 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, वे भी दिसंबर-2018 में रिटायर हो गए थे। नौकरशाही में बड़ा दखल रखने वाले एक अधिकारी का कहना है कि उस दौरान इन अफसरों की जगह पर नई नियुक्ति करना ठीक नहीं समझा गया। कुछ ऐसी बातें रही, जिनकी वजह से इन्हें छह माह का सेवा विस्तार दे दिया गया। हालांकि इससे पहले इन एजेंसियों में कभी किसी अफसर को इस तरह से एक्सटेंशन नहीं मिला। पीएमओ, डीओपीटी और एनएसए इन दोनों अफसरों की कार्यप्रणाली से खुश हैं, इसलिए इन्हें पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग मिलना लगभग तय है। इनमें एक अफसर को जम्मू-कश्मीर भेजे जाने की चर्चाएं हैं। 

एजेंसी में काम करने का लंबा अनुभव रखने वाले अफसरों को मिलेगी तव्वजो…
रॉ और आईबी के नए निदेशकों का नाम इन्हीं एजेंसियों में काम कर रहे अफसरों में से ही तय किया जाएगा। रॉ के लिए पहले स्पेशल सेक्रेटरी सामंत गोयल का नाम सामने आया था। हालांकि सीबीआई विवाद में कथित तौर पर इनका नाम आने के बाद पीएमओ ने उस वक्त गोयल को रॉ सौंपने से गुरेज किया था। गोयल को पंजाब के सीएम कैप्टन अमरेंद्र सिंह का भी विश्वस्त माना जाता है।

सर्वविदित है कि कैप्टन इन्हें पंजाब में बतौर डीजीपी के पद पर नियुक्त करना चाहते थे। इनके बाद दूसरा नाम के.इलांगो का सामने आया था। इलांगो के बारे में कहा जाता है कि 2015 में श्रीलंका में तैनाती के दौरान इनका नाम विवादों में आ गया। श्रीलंका सरकार ने इनकी वापसी के लिए भारत सरकार को लिखा था। एनएसए अजीत डोभाल को खुद श्रीलंका जाकर स्थिति साफ करनी पड़ी थी। ऐसे में अब इलांगो को रॉ के सेक्रेटरी पद पर तैनात करने की संभावनाएं कम हैं। इनके बाद एमपी कॉडर के वी. जौहरी और आर.कुमार का नाम आता है। बताया जाता है कि इन दोनों में से ही किसी एक अफसर को रॉ के स्पेशल सेक्रेटरी की जिम्मेदारी दी जा सकती है। दूसरी ओर आईबी डायरेक्टर के लिए बिहार कॉडर के 1984 बैच के अधिकारी अरविंद कुमार का नाम चल रहा है। कुमार को कश्मीर मामलों और काउंटर टेरोरिज्म का एक्सपर्ट का माना जाता है।

पीएमओ में कई अफसर हो सकते हैं इधर-उधर…
प्रधानमंत्री कार्यालय में कई अफसर भी इधर-उधर हो सकते हैं। पीएम के एडीशनल प्रिसिंपल सेक्रेटरी डॉ. पीके मिश्रा पीएमओ की धुरी बने रहेंगे। एनएसए अजीत डोभाल के साथ कई नए डिप्टी एनएसए आ सकते हैं। हालांकि पहले भी यहां ज्वाइंट इंटेलीजेंस कमेटी के चेयरमैन रहे आरएन रवि, रॉ के पूर्व सचिव राजेंद्र खन्ना और पूर्व राजदूत पंकज सरन बतौर डिप्टी एनएसए काम कर रहे हैं। एक अधिकारी का कहना है कि मोदी के दूसरे कार्यकाल में एनएसए का विस्तार होगा। इसमें सुरक्षा से जुड़े मामलों पर गहरी पकड़ रखने वाले एक्सपर्ट भी शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि आर्मी के विशेषज्ञ भी एनएसए का हिस्सा बन सकते हैं। साथ ही उत्तर पूर्व, जम्मू कश्मीर, नक्सल और बॉर्डर मेनेजमेंट के एक्सपर्ट भी एनएसए से जुड़ेंगे।

दूसरी बार प्रचंड बहुमत लेकर प्रधानमंत्री बनने जा रहे नरेंद्र मोदी की पावरफुल अफसर लॉबी में भी इस दफा नए चेहरे देखने को मिलेंगे। यह तय है कि इस बार भी राष्ट्रीय सुरक्षा सुलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ही अफसरों की इस लॉबी के केंद्र में रहेंगे। पीएमओ के अलावा देश की आंतरिक खुफिया एजेंसी आईबी और विदेशी मामलों की खुफिया एजेंसी रॉ के चीफ भी अगले माह तक बदल दिए जाएंगे। जम्मू-कश्मीर को लेकर सरकार पहले से ही गंभीर है, वहां नई रणनीति के तहत राज्यपाल के सलाहकार पद पर नई नियुक्तियां किए जाने की चर्चा है।

बता दें कि रॉ चीफ अनिल धस्माना, जो कि मध्यप्रदेश कॉडर के 1981 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, उनका कार्यकाल दिसंबर-18 में खत्म हो गया था। इसी तरह आईबी डायरेक्टर राजीव जैन, जो कि झारखंड कॉडर के 1980 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, वे भी दिसंबर-2018 में रिटायर हो गए थे। नौकरशाही में बड़ा दखल रखने वाले एक अधिकारी का कहना है कि उस दौरान इन अफसरों की जगह पर नई नियुक्ति करना ठीक नहीं समझा गया। कुछ ऐसी बातें रही, जिनकी वजह से इन्हें छह माह का सेवा विस्तार दे दिया गया। हालांकि इससे पहले इन एजेंसियों में कभी किसी अफसर को इस तरह से एक्सटेंशन नहीं मिला। पीएमओ, डीओपीटी और एनएसए इन दोनों अफसरों की कार्यप्रणाली से खुश हैं, इसलिए इन्हें पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग मिलना लगभग तय है। इनमें एक अफसर को जम्मू-कश्मीर भेजे जाने की चर्चाएं हैं। 

एजेंसी में काम करने का लंबा अनुभव रखने वाले अफसरों को मिलेगी तव्वजो…
रॉ और आईबी के नए निदेशकों का नाम इन्हीं एजेंसियों में काम कर रहे अफसरों में से ही तय किया जाएगा। रॉ के लिए पहले स्पेशल सेक्रेटरी सामंत गोयल का नाम सामने आया था। हालांकि सीबीआई विवाद में कथित तौर पर इनका नाम आने के बाद पीएमओ ने उस वक्त गोयल को रॉ सौंपने से गुरेज किया था। गोयल को पंजाब के सीएम कैप्टन अमरेंद्र सिंह का भी विश्वस्त माना जाता है।

सर्वविदित है कि कैप्टन इन्हें पंजाब में बतौर डीजीपी के पद पर नियुक्त करना चाहते थे। इनके बाद दूसरा नाम के.इलांगो का सामने आया था। इलांगो के बारे में कहा जाता है कि 2015 में श्रीलंका में तैनाती के दौरान इनका नाम विवादों में आ गया। श्रीलंका सरकार ने इनकी वापसी के लिए भारत सरकार को लिखा था। एनएसए अजीत डोभाल को खुद श्रीलंका जाकर स्थिति साफ करनी पड़ी थी। ऐसे में अब इलांगो को रॉ के सेक्रेटरी पद पर तैनात करने की संभावनाएं कम हैं। इनके बाद एमपी कॉडर के वी. जौहरी और आर.कुमार का नाम आता है। बताया जाता है कि इन दोनों में से ही किसी एक अफसर को रॉ के स्पेशल सेक्रेटरी की जिम्मेदारी दी जा सकती है। दूसरी ओर आईबी डायरेक्टर के लिए बिहार कॉडर के 1984 बैच के अधिकारी अरविंद कुमार का नाम चल रहा है। कुमार को कश्मीर मामलों और काउंटर टेरोरिज्म का एक्सपर्ट का माना जाता है।

पीएमओ में कई अफसर हो सकते हैं इधर-उधर…
प्रधानमंत्री कार्यालय में कई अफसर भी इधर-उधर हो सकते हैं। पीएम के एडीशनल प्रिसिंपल सेक्रेटरी डॉ. पीके मिश्रा पीएमओ की धुरी बने रहेंगे। एनएसए अजीत डोभाल के साथ कई नए डिप्टी एनएसए आ सकते हैं। हालांकि पहले भी यहां ज्वाइंट इंटेलीजेंस कमेटी के चेयरमैन रहे आरएन रवि, रॉ के पूर्व सचिव राजेंद्र खन्ना और पूर्व राजदूत पंकज सरन बतौर डिप्टी एनएसए काम कर रहे हैं। एक अधिकारी का कहना है कि मोदी के दूसरे कार्यकाल में एनएसए का विस्तार होगा। इसमें सुरक्षा से जुड़े मामलों पर गहरी पकड़ रखने वाले एक्सपर्ट भी शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि आर्मी के विशेषज्ञ भी एनएसए का हिस्सा बन सकते हैं। साथ ही उत्तर पूर्व, जम्मू कश्मीर, नक्सल और बॉर्डर मेनेजमेंट के एक्सपर्ट भी एनएसए से जुड़ेंगे।

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