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नकली जाति प्रमाणपत्र इस्तेमाल करने वाले छात्रों को मिलेगी कड़ी सजा, जानिए यहां

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एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Updated Thu, 18 Oct 2018 05:21 PM IST

जाति प्रमाणपत्र

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गुजरात विधान सभा द्वारा इस वर्ष मार्च में नौकरी और शिक्षा के लिए नकली जाति प्रमाणपत्र इस्तेमाल करने वाले छात्रों को दंड दिए जाने का आग्रह किया था। बता दें की, देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस बिल पर अपनी मंजूरी दे दी है।

अधिकारियतों ने बताया की राष्ट्रपति कोविंद ने गुजरात के एससी/ एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग बिल 2018 पर मंजूरी दे दी है। ये बिल मढ़ 2018 बजट सेशन में पास किया गया था।

इस प्रावधान के अनुसार यदि कोई व्यक्ति शिक्षा संसथान में आवेदन करने हेतु या नौकरी के लिए झूठा जाति प्रमाणपत्र बनाता है या बनवाता है तो उसे 3 साल के जेल की सजा सुनाई जाएगी। सजापात्र व्यक्ति को 50000 रुपये का जुर्माना भी भरना होगा।

साथ ही ग्राम पंचायत या स्थानीय चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी भी यदि इन नियमों का उलंघन करते हैं तो उनके लिए भी सजा का प्रावधान है। उस व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं रह जायेगा और उसे चुनाव में अमान्य घोषित कर दिया जायेगा।

सरकारी अधिकारी भी ऐसा करने पर सजा के पात्र होंगे। सरकारी नौकरी करने वाले कर्मचारी यदि ऐसा करते हैं तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया जायेगा। शिक्षण संसथान में नकली जाति प्रमाणपत्र का पता चलने पर छात्रों की डिग्री भी रद्द कर दी जाएगी।

एससी/एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए नियोग है जहां सरकारी अधिकारी जाति प्रमाणपत्र जारी करता है। एक बार जाति प्रमाणपत्र बनने के बाद जांच समिति उसे सत्यापित करेगी। जिसके बाद ही जाति प्रमाणपत्र मान्य होगा।

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