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वाहन की रफ्तार ले रही है रोजाना करीब 400 लोगों की जान

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भारत के लोग रफ्तार के दीवाने हैं इस बात से तो सभी अवगत हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही रफ्तार लोगों की जान की दुश्मन बन रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले साल लगभग 4 लाख रोड़ ऐक्सिडेंट हुए। जिनमें मरने वालो की संख्या 1 लाख से भी ज्यादा थी और इसमें घायल लोगों की संख्या 4  लाख से भी ज्यादा रही।

आंकड़ों की बात करें तो भारत में रोजाना लगभग एक हजार हादसे होते हैं जिनमें  हर घंटे 16 लोगों की मौत हो जाती है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में लोग ड्राइविंग करते समय लोग कितनी लापरवाही बरतते हैं। पिछले साल चौपहिया हलके वाहनों से लगभग तीस प्रतिशत हादसे हुए। वहीं बात करें भारी वाहनों की तो ट्रक, ट्रैक्टर आदि से 20 प्रतिशत हादसे हुए।

इनमें सबसे ज्यादा हादसे दो पहियां वाहन से हुए, जिसका आंकड़ा तकरीबन 34 प्रतिशत है। यानी आज के समय में चौपहिया वाहनों की तुलना में दो पहिया वाहन ज्यादा जान के दुश्मन बने हुए हैं। कई बार आपने देखा होगा लोग जल्दी पहुंचने के चक्कर में नियमों को ताक पर रखकर सिर्फ बाइक भगाने में विश्वास रखते हैं। इसकी कीमत इन्हें अपनी जान से चुकानी पड़ती है। 

बात करें सरकारी आंकड़ो की तो रोड ऐक्सिडेंट में साल 2016 की तुलना में लगभग 4 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं इसमें घायल होने वालों की संख्या में भी करीब 4.8 फीसदी की गिरावट हुई है। इन हादसों में सबसे पहला नंबर तमिलनाडु का है। उसके बाद मध्य प्रदेश और कर्नाटक की सड़कों पर सबसे ज्यादा हादसे होते हैं।

भारत के लोग रफ्तार के दीवाने हैं इस बात से तो सभी अवगत हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही रफ्तार लोगों की जान की दुश्मन बन रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले साल लगभग 4 लाख रोड़ ऐक्सिडेंट हुए। जिनमें मरने वालो की संख्या 1 लाख से भी ज्यादा थी और इसमें घायल लोगों की संख्या 4  लाख से भी ज्यादा रही।

आंकड़ों की बात करें तो भारत में रोजाना लगभग एक हजार हादसे होते हैं जिनमें  हर घंटे 16 लोगों की मौत हो जाती है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में लोग ड्राइविंग करते समय लोग कितनी लापरवाही बरतते हैं। पिछले साल चौपहिया हलके वाहनों से लगभग तीस प्रतिशत हादसे हुए। वहीं बात करें भारी वाहनों की तो ट्रक, ट्रैक्टर आदि से 20 प्रतिशत हादसे हुए।

इनमें सबसे ज्यादा हादसे दो पहियां वाहन से हुए, जिसका आंकड़ा तकरीबन 34 प्रतिशत है। यानी आज के समय में चौपहिया वाहनों की तुलना में दो पहिया वाहन ज्यादा जान के दुश्मन बने हुए हैं। कई बार आपने देखा होगा लोग जल्दी पहुंचने के चक्कर में नियमों को ताक पर रखकर सिर्फ बाइक भगाने में विश्वास रखते हैं। इसकी कीमत इन्हें अपनी जान से चुकानी पड़ती है। 

बात करें सरकारी आंकड़ो की तो रोड ऐक्सिडेंट में साल 2016 की तुलना में लगभग 4 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं इसमें घायल होने वालों की संख्या में भी करीब 4.8 फीसदी की गिरावट हुई है। इन हादसों में सबसे पहला नंबर तमिलनाडु का है। उसके बाद मध्य प्रदेश और कर्नाटक की सड़कों पर सबसे ज्यादा हादसे होते हैं।

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