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पुलिस स्मारक दिवस विशेष: सोनम वांग्याल चीनी सैनिकों द्वारा धोखे से मारे गए सैनिकों का शव ऐसे लाए थे

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मिशन हॉट स्प्रिंग के हीरो सोनम वांग्याल
– फोटो : Social Media

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चीनी सैनिकों का धोखा सामने आता है तो हॉट स्प्रिंग के हीरो सोनम वांग्याल का मन कड़वाहट से भर जाता है। भारतीय इलाके में घुसपैठ करने वाली चीनी फौज ने हमारे जवानों को धोखे से मार डाला था। कई फुट बर्फ पड़ी थी और मैं अकेला था। मेरे सामने 10 जवानों के शव पड़े थे। शवों को लाने के लिए मैंने लकड़ी और तिरपाल का स्ट्रेचर बनाया। शवों को घोड़ों की मदद से खींचते हुए सिलुंग नाले के रास्ते हॉट स्प्रिंग (लेह में चीनी सैनिकों के कब्जे से मुक्त कराई गई भारतीय चौकी) तक लाया। शव इतने क्षत-विक्षत हो चुके थे कि उन्हें आगे ले जाना मुश्किल था। मैंने वहीं पर लकड़ियां एकत्रित की और अपने साथियों का अंतिम संस्कार कर दिया। 

सीआरपीएफ से रिटायर्ड और उस मिशन के एकमात्र जीवित नायक सोनम वांग्याल (76) ने लेह से ‘अमर उजाला डॉट कॉम’ के साथ खास बातचीत की है। उन्होंने कहा, हमारे जवान चीनी सैनिकों के साथ बहादुरी से लड़े थे। भारत के कई जवान शहीद हुए। अच्छी बात ये है कि उन्हीं शहीदों के सम्मान में हर वर्ष 21 अक्तूबर को देश में पुलिस संस्मरण दिवस मनाया जाता है। 

1965 में मात्र 25 साल की आयु में एवरेस्ट विजेता बने वांग्याल के मुताबिक, 1962 की लड़ाई से पहले 1959 में चीनी सैनिकों ने लेह-लद्दाख के कई इलाकों में घुसपैठ की थी। 21 अक्तूबर 1959 का दिन और 16,300 फुट की ऊंचाई पर लद्दाख में जीरो से 40 डिग्री नीचे तापमान। यह मालूम होते हुए कि इलाके में चीनी सैनिकों ने बड़े पैमाने पर घुसपैठ की है, मुट्ठीभर जवानों को हॉट स्प्रिंग पर चौकी स्थापित करने का आदेश मिला। भारतीय जवान चौकी स्थापित करने में तो कामयाब हो गए, लेकिन अपने लापता साथियों की तलाश के दौरान सैकड़ों चीनी सैनिकों ने उन्हें निशाने पर ले लिया। दर्जनभर जवानों को धोखे से मार डाला। जो बच गए उन्हें हिरासत में ले लिया गया। 

डीएसपी करमसिंह ने मिट्टी हाथ में उठाकर कहा, ये जमीन हमारी है 

सितंबर 1959 में उनके दस्ते को हॉट स्प्रिंग, जिसके निकट चीनी फौज पहुंच चुकी थी, पर चौकी स्थापित करने का आदेश मिला। 70 जवानों की दो टुकड़ी बनाई गई। एक का नेतृत्व आईटीबीएफ के डीएसपी करमसिंह और दूसरी टुकड़ी की कमान एसपी त्यागी को सौंपी गई।
चौकी को चीनी कब्जे से मुक्त करा लिया गया, लेकिन सोनम सहित दर्जनभर जवान पकड़े गए। कुछ दिन बाद सोनम और उनके साथी चुशुल एयरपोर्ट के निकट रिहा कर दिए गए। बाद में पता चला कि आईटीबीएफ के डीएसपी करमसिंह की टुकड़ी के सात जवान जवान बेस कैंप पर नहीं पहुंचे।

20 अक्तूबर को डीएसपी कर्मसिंह के नेतृत्व में सोनम सहित करीब दो दर्जन जवान अपने लापता साथियों की तलाश में निकल पड़े। उन्हें रास्ते में चीनी सैनिकों और उनके घोड़ों के चिह्न दिखाई दिए। इससे पहले कि वे कोई रणनीति बनाते, एकाएक चीनी सैनिकों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया।

करमसिंह ने मिट्टी हाथ में उठाकर कहा, यह जमीन हमारी है। चीनी सैनिकों ने भी वैसा ही किया। खास बात है कि अगले दिन दोपहर तक यह खेल चलता रहा। लड़ाई का बहाना एक पत्थर बना, जिसे चीनी फौज के कमांडर ने फेंका था। जब हमने विरोध किया तो हम पर चारों तरफ से फायरिंग शुरू कर दी गई।

बर्फ में हमारे हथियार जवाब दे चुके थे। उस लड़ाई में हमारे 10 जवान शहीद हुए और डीएसपी करमसिंह सहित कई सिपाही चीनी सैनिकों की गिरफ्त में आ गए। सिपाही मक्खन लाल जो कि उस वक्त घायल हुआ था, आज तक वापस नहीं लौटा। अन्य जवानों को बाद में रिहा कर दिया गया, मगर उनमें मक्खन नहीं था। आज भी जब उसकी याद आती है तो मन भर उठता है।

सोनम वांग्याल का कहना है कि आज भारत-चीन सीमा पर काफी हद तक हालात सुधरे हैं। अब उस तरीके से चीन कोई दुस्साहस नहीं कर सकता। हालांकि चीन अपने धोखे और जमीन कब्जाने की फितरत से बाज नहीं आएगा। लेकिन यह भी सच है कि वह आज 1959 और 1962 वाली हरकत को दोहराने की हिम्मत नहीं कर सकता। 

चीनी सैनिकों का धोखा सामने आता है तो हॉट स्प्रिंग के हीरो सोनम वांग्याल का मन कड़वाहट से भर जाता है। भारतीय इलाके में घुसपैठ करने वाली चीनी फौज ने हमारे जवानों को धोखे से मार डाला था। कई फुट बर्फ पड़ी थी और मैं अकेला था। मेरे सामने 10 जवानों के शव पड़े थे। शवों को लाने के लिए मैंने लकड़ी और तिरपाल का स्ट्रेचर बनाया। शवों को घोड़ों की मदद से खींचते हुए सिलुंग नाले के रास्ते हॉट स्प्रिंग (लेह में चीनी सैनिकों के कब्जे से मुक्त कराई गई भारतीय चौकी) तक लाया। शव इतने क्षत-विक्षत हो चुके थे कि उन्हें आगे ले जाना मुश्किल था। मैंने वहीं पर लकड़ियां एकत्रित की और अपने साथियों का अंतिम संस्कार कर दिया। 

सीआरपीएफ से रिटायर्ड और उस मिशन के एकमात्र जीवित नायक सोनम वांग्याल (76) ने लेह से ‘अमर उजाला डॉट कॉम’ के साथ खास बातचीत की है। उन्होंने कहा, हमारे जवान चीनी सैनिकों के साथ बहादुरी से लड़े थे। भारत के कई जवान शहीद हुए। अच्छी बात ये है कि उन्हीं शहीदों के सम्मान में हर वर्ष 21 अक्तूबर को देश में पुलिस संस्मरण दिवस मनाया जाता है। 

1965 में मात्र 25 साल की आयु में एवरेस्ट विजेता बने वांग्याल के मुताबिक, 1962 की लड़ाई से पहले 1959 में चीनी सैनिकों ने लेह-लद्दाख के कई इलाकों में घुसपैठ की थी। 21 अक्तूबर 1959 का दिन और 16,300 फुट की ऊंचाई पर लद्दाख में जीरो से 40 डिग्री नीचे तापमान। यह मालूम होते हुए कि इलाके में चीनी सैनिकों ने बड़े पैमाने पर घुसपैठ की है, मुट्ठीभर जवानों को हॉट स्प्रिंग पर चौकी स्थापित करने का आदेश मिला। भारतीय जवान चौकी स्थापित करने में तो कामयाब हो गए, लेकिन अपने लापता साथियों की तलाश के दौरान सैकड़ों चीनी सैनिकों ने उन्हें निशाने पर ले लिया। दर्जनभर जवानों को धोखे से मार डाला। जो बच गए उन्हें हिरासत में ले लिया गया। 

डीएसपी करमसिंह ने मिट्टी हाथ में उठाकर कहा, ये जमीन हमारी है 

सितंबर 1959 में उनके दस्ते को हॉट स्प्रिंग, जिसके निकट चीनी फौज पहुंच चुकी थी, पर चौकी स्थापित करने का आदेश मिला। 70 जवानों की दो टुकड़ी बनाई गई। एक का नेतृत्व आईटीबीएफ के डीएसपी करमसिंह और दूसरी टुकड़ी की कमान एसपी त्यागी को सौंपी गई।

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रास्ते में चीनी सैनिकों और उनके घोड़ों के चिह्न दिखाई दिए

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