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बड़ी खबर: फ्री ऐप का गया जमाना, गूगल अब एक मोबाइल से वसूलेगा 2,937 रुपये

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यह बात तो आप भी जानते हैं कि एंड्रॉयड फोन में एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम को गूगल फ्री में देता है। मोबाइल कंपनियों से एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए गूगल पैसे नहीं लेता, इसके बदले में मोबाइल कंपनियों को एंड्रॉयड फोन में गूगल के जीमेल, गूगल म्यूजिक, गूगल फोटोज, मैप्स आदि ऐप अनिवार्य से फोन के साथ ही देना होता है।

अभी कुछ महीने पहले ही गूगल पर इसी के लिए 5.1 बिलियन यूरो यानि करीब 344 अरब रुपये का जुर्माना भी लगा था। गूगल पर आरोप था कि उसने एंड्रॉयड फोन में अपने ऐप को जबरदस्ती इंस्टॉल करवाए हैं और गलत तरीके से सर्च इंजन को पहले के मुकाबले मजबूत बनाया है। 

वहीं अब गूगल ने अपनी शर्तों में कुछ बदलाव किए हैं जिसके बाद वह मोबाइल कंपनियों से अपने ऐप के बदले पैसे लेगा। अल्फाबेट गूगल ने मोबाइल कंपनियों से अपने ऐप के लिए प्रति मोबाइल 40 डॉलर यानि करीब 2,900 रुपये वसूल करेगा। गूगल की यह नई शर्त इसी महीने 29 अक्टूबर से लागू हो जाएगी यानि 29 अक्टूबर के बाद लांच होने वाले सभी एंड्रॉयड स्मार्टफोन और टैबलेट में ऐप के बदले हैंडसेट निर्माता कंपनियों को पैसे देने होंगे।

ये भी पढ़ेंः गूगल सिर्फ 18 दिनों की कमाई से चुका सकता है 344 अरब रुपये का जुर्माना

हालांकि गूगल की यह नई शर्त यूरोपियन देशों में लागू होगी ना कि भारत में। यह फीस अलग-अलग देशों के लिए अलग-अलग भी हो सकती है। गूगल प्ले-स्टोर, जीमेल, गूगल मैप्स जैसे ऐप के लिए पैसे लेने के बदले गूगल मोबाइल निर्माता कंपनियों को विज्ञापन से होने वाली कमाई का एक हिस्सा देगा। गूगल अपने क्रोम ब्राउजर जैसे ऐप में विज्ञापन दिखाएगा।

बता दें कि इसी साल जुलाई में गूगल पर यूरोपियन यूनियन ने 5.1 बिलियन यूरो यानि करीब 344 अरब रुपये का जुर्माना लगाया था जो कि गूगल के इतिहास में उसपर लगने वाला अबतक का सबसे बड़ा जुर्माना था। गूगल के खिलाफ अप्रैल 2015 में  फेयरसर्च’ नाम के एक बिजनेस ग्रुप ने यूरोपियन यूनियन में शिकायत की थी और कहा था कि गूगल अपने ऐप के जरिए एंड्रॉयड स्मार्टफोन में अधिकार जमा रहा है। इस ग्रुप में नोकिया, माइक्रोसॉफ्ट और ओरेकल जैसी कंपनियां भी शामिल हैं।

यह बात तो आप भी जानते हैं कि एंड्रॉयड फोन में एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम को गूगल फ्री में देता है। मोबाइल कंपनियों से एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए गूगल पैसे नहीं लेता, इसके बदले में मोबाइल कंपनियों को एंड्रॉयड फोन में गूगल के जीमेल, गूगल म्यूजिक, गूगल फोटोज, मैप्स आदि ऐप अनिवार्य से फोन के साथ ही देना होता है।

अभी कुछ महीने पहले ही गूगल पर इसी के लिए 5.1 बिलियन यूरो यानि करीब 344 अरब रुपये का जुर्माना भी लगा था। गूगल पर आरोप था कि उसने एंड्रॉयड फोन में अपने ऐप को जबरदस्ती इंस्टॉल करवाए हैं और गलत तरीके से सर्च इंजन को पहले के मुकाबले मजबूत बनाया है। 

वहीं अब गूगल ने अपनी शर्तों में कुछ बदलाव किए हैं जिसके बाद वह मोबाइल कंपनियों से अपने ऐप के बदले पैसे लेगा। अल्फाबेट गूगल ने मोबाइल कंपनियों से अपने ऐप के लिए प्रति मोबाइल 40 डॉलर यानि करीब 2,900 रुपये वसूल करेगा। गूगल की यह नई शर्त इसी महीने 29 अक्टूबर से लागू हो जाएगी यानि 29 अक्टूबर के बाद लांच होने वाले सभी एंड्रॉयड स्मार्टफोन और टैबलेट में ऐप के बदले हैंडसेट निर्माता कंपनियों को पैसे देने होंगे।

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हालांकि गूगल की यह नई शर्त यूरोपियन देशों में लागू होगी ना कि भारत में। यह फीस अलग-अलग देशों के लिए अलग-अलग भी हो सकती है। गूगल प्ले-स्टोर, जीमेल, गूगल मैप्स जैसे ऐप के लिए पैसे लेने के बदले गूगल मोबाइल निर्माता कंपनियों को विज्ञापन से होने वाली कमाई का एक हिस्सा देगा। गूगल अपने क्रोम ब्राउजर जैसे ऐप में विज्ञापन दिखाएगा।

बता दें कि इसी साल जुलाई में गूगल पर यूरोपियन यूनियन ने 5.1 बिलियन यूरो यानि करीब 344 अरब रुपये का जुर्माना लगाया था जो कि गूगल के इतिहास में उसपर लगने वाला अबतक का सबसे बड़ा जुर्माना था। गूगल के खिलाफ अप्रैल 2015 में  फेयरसर्च’ नाम के एक बिजनेस ग्रुप ने यूरोपियन यूनियन में शिकायत की थी और कहा था कि गूगल अपने ऐप के जरिए एंड्रॉयड स्मार्टफोन में अधिकार जमा रहा है। इस ग्रुप में नोकिया, माइक्रोसॉफ्ट और ओरेकल जैसी कंपनियां भी शामिल हैं।

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